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एमपी का प्रशासनिक ढांचा बदलेगा : 3 नए जिले और 11वां संभाग बनाने की तैयारी, सीमाएं होंगी पुनर्गठित

एमपी का प्रशासनिक ढांचा बदलेगा : 3 नए जिले और 11वां संभाग बनाने की तैयारी, सीमाएं होंगी पुनर्गठित

राहुल सेन मांडव
मो 9669141814

भोपाल न्यूज/मध्यप्रदेश सरकार राज्य के प्रशासनिक नक्शे में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके तहत संभाग, जिले और तहसीलों की सीमाओं का पुनर्गठन किया जाएगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार प्रदेश को एक नया संभाग और तीन नए जिले मिल सकते हैं, जबकि राजधानी भोपाल में भी तहसीलों की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

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यह पूरी कवायद राज्य प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग द्वारा पिछले एक वर्ष से की जा रही है। आयोग का उद्देश्य जनगणना से पहले प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं को अंतिम रूप देना है, क्योंकि इसके बाद सीमाओं में बदलाव संभव नहीं होगा।

जनसंख्या और प्रशासनिक सुविधा बने आधार

आयोग जिले-दर-जिले बैठकें कर रहा है, जिनमें जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति और प्रशासनिक सुगमता को मुख्य आधार माना जा रहा है। इन्हीं मानकों पर नए जिले, संभाग और तहसीलों का गठन प्रस्तावित किया जाएगा।

IIPA के सहयोग से तैयार होगी सीमांकन रिपोर्ट

सीमांकन प्रक्रिया को तकनीकी रूप से सटीक बनाने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (IIPA) का सहयोग लिया गया है। ड्रोन और सैटेलाइट सर्वे के जरिए सीमाओं का निर्धारण किया जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद आयोग विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसे नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के सुझावों के बाद सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

तीन नए जिले और एक नया संभाग प्रस्तावित

प्रस्ताव के अनुसार पिपरिया, बीना और सिहोरा को नया जिला बनाए जाने की सबसे अधिक संभावनाएं हैं। वहीं निमाड़ को मध्यप्रदेश का 11वां संभाग बनाने की तैयारी चल रही है। इसके अलावा भोपाल में 8 नई तहसीलों के गठन की प्रक्रिया भी जारी है।

पिपरिया को जिला बनाने की मजबूत मांग

नर्मदापुरम जिले का हिस्सा पिपरिया जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर है। पहाड़ी इलाका होने के कारण यहां पहुंचने में करीब दो घंटे लगते हैं। प्रशासनिक असुविधाओं को लेकर पिपरिया को जिला बनाने की मांग लंबे समय से उठती रही है, जिसके लिए कई बार आंदोलन भी हो चुके हैं।

सिहोरा: 22 साल पुराना आंदोलन

जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील को अलग जिला बनाने की मांग पिछले 22 वर्षों से चल रही है। हाल ही में स्थानीय लोगों ने खून से दीपक जलाकर विरोध प्रदर्शन किया था। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द फैसला नहीं हुआ तो वे आमरण सत्याग्रह करेंगे।

बीना जिला बनने की मांग अब तक अधूरी

बुंदेलखंड क्षेत्र की बीना तहसील को जिला बनाने की मांग वर्षों से लंबित है। राजनीतिक कारणों से पहले खुरई को जिला बनाने की कोशिशें हुईं, जिससे बीना का प्रस्ताव पीछे रह गया।

निमाड़ बन सकता है प्रदेश का 11वां संभाग

यदि निमाड़ को नया संभाग बनाया जाता है तो इसमें खरगोन, बड़वानी, खंडवा और बुरहानपुर जिले शामिल हो सकते हैं। वर्तमान में इन जिलों के लोगों को राजस्व और अपील संबंधी मामलों के लिए इंदौर जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती है।

भोपाल में बढ़ेगी तहसीलों की संख्या

फिलहाल भोपाल में हुजूर, कोलार और बैरसिया—तीन तहसीलें हैं। प्रस्तावित पुनर्गठन के बाद पुराना भोपाल, संत हिरदाराम नगर, एमपी नगर, गोविंदपुरा और टीटी नगर सहित कुल आठ तहसीलें हो सकती हैं, जिससे प्रशासनिक कामकाज और अधिक आसान होगा।

रीवा-मैहर की सीमाओं में बदलाव पर विवाद

रीवा और मैहर जिलों की सीमाओं में बदलाव का प्रस्ताव सामने आया है। मैहर जिले की अमरपाटन तहसील के छह गांवों को रीवा में शामिल करने का सुझाव दिया गया है, जिस पर सतना सांसद गणेश सिंह ने विरोध जताते हुए इसे क्षेत्रीय और सांस्कृतिक संतुलन के खिलाफ बताया है।

31 दिसंबर से पहले नहीं बने तो 2027 तक इंतजार

मुख्य सचिव अनुराग जैन ने निर्देश दिए हैं कि सभी प्रशासनिक परिवर्तन 31 दिसंबर 2025 तक पूरे कर लिए जाएं। इसके बाद सीमाएं फ्रीज कर दी जाएंगी। यदि इस तारीख से पहले नए जिले या संभाग अस्तित्व में नहीं आते हैं, तो फिर इनके गठन की संभावना मार्च 2027 के बाद ही बन पाएगी, क्योंकि 2026-27 में देशभर में जनगणना प्रस्तावित है।

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