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हमीरपुर:सरकार को करोडों रुपये के राजस्व का लगाया जा रहा चूना

रिपोर्टर राजकुमार हमीरपुर अखंड भारत 

मौदहा हमीरपुर। कस्बे में इस समय प्लाटिंग का कारोबार चरम सीमा में है। प्लाटिंग कारोबारी उपजाऊ कृषि भूमि को व्यावसायिक भूमि में तब्दील कर राजस्व को लाखों का नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि कस्बे के चुनिंदा लोगों द्वारा की जा रही राजस्व चोरी की जानकारी यहां के प्रशासन को नहीं है लेकिन ऐसे राजस्व चोरों को प्रशासन की खुली छूट कहीं न कहीं जिम्मेदारों के ऊपर प्रश्नवाचक चिन्ह खड़ा कर रहा है।

नगर मौदहा सहित राजस्व क्षेत्र में इस समय कृषि भूमि को व्यावसायिक भूमि में बदलकर प्लाटिंग का काम भू-स्वामियों द्वारा धड़ल्ले से किया जा रहा है। वहीं बात करें कृषि भूमि में प्लाटिंग की तो बाकायदा राजस्व विभाग से कृषि भूमि को व्यावसायिक भूमि में तब्दील करानी होती है। इस तब्दीली प्रक्रिया में राजस्व को धन अर्जित होता है। लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी या फिर स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से लाखों रूपये की राजस्व चोरी करवाई जाती है जो जिम्मेदारों की जिम्मेदारी पर खुला प्रश्नवाचक चिन्ह खड़ा कर रहा है। एक तरफ जिम्मेदारों से राजस्व चोरों को मिली इस भारी छूट जहां संजीवनी प्रदान करती है तो वहीं जिम्मेदारों की इस उदासीनता से राज्य सरकार को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है। यदि बात करें अवैध प्लाटिंग की तो कस्बे से जुड़े राजकीय महाविद्यालय के पीछे, कम्हरिया रोड, मीरा तालाब कालोनी के पास, स्टेशन रोड, कपसा रोड, मुस्करा रोड पर मुख्य रूप से अवैध प्लाटिंग का काला कारोबार चरम सीमा पर है। अवैध कारोबार में अपने पैर फैला चुके कारोबारियों को स्थानीय प्रशासन की यह खुली छूट प्रदान करना अवैध प्लाटिंग कारोबारियों से संलिप्तता को दर्शाता है। इस संबंध में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए जब तहसीलदार मौदहा शेखर मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कृषि भूमि को व्यावसायिक भूमि में बदलाने की प्रक्रिया धारा 80 के तहत अकृषि भूमि कराई जाती है, यदि वह भूमि नगर क्षेत्र के अन्तर्गत आती है तो नगरपालिका का दायित्व है कि वह बकायदे पूरी प्रक्रिया को विधिक तरीके से संपन्न कराए, अन्यथा अवैध साबित होगा।

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