

✍️✍️✍️✍️✍️अखंड भारत न्यूज़ जियाउद्दीन अंसारी
*शहडोल / धनपुरी* एक ओर सरकार हर घर तक नल से जल पहुंचाने के ‘नल-जल योजना’ को प्राथमिकता दे रही है, वहीं दूसरी ओर शहडोल जिले की नगर पालिका परिषद धनपुरी में इस योजना के तहत नए नल कनेक्शन लेने वाले आम नागरिकों को घोर अनियमितताओं और नगरपालिका कर्मचारियों एवं कथित दलालों के गठजोड़ के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नागरिक सुविधाओं के नाम पर हो रही यह लेटलतीफी और मनमानी, नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
प्राप्त शिकायतों के अनुसार, नल कनेक्शन प्राप्त करने के लिए आम जनता लोक सेवा केंद्र के माध्यम से आवेदन कर रही है। लोक सेवा केंद्र द्वारा आवेदन स्वीकार कर उन्हें एक निश्चित समयावधि का आश्वासन भी दिया जाता है। लेकिन इसके बाद जब नागरिक निर्धारित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए नगर पालिका के संबंधित कर्मचारियों से संपर्क करते हैं, तो उन्हें केवल टालमटोल और निराशा ही हाथ लगती है।
पीड़ित नागरिकों का कहना है कि वे जब भी नगरपालिका कर्मचारियों से अपने आवेदन की स्थिति के बारे में पूछते हैं, तो उन्हें हर बार अलग-अलग बहाने बताए जाते हैं। कभी कहा जाता है कि “अभी लोक सेवा केंद्र से कागजात नहीं आए हैं,” तो कभी यह कहकर टाल दिया जाता है कि “अभी कनेक्शन का पैसा जमा नहीं हो रहा है।” नागरिकों को यह आश्वासन देकर लौटा दिया जाता है कि कागजात आते ही उन्हें फोन करके बुलाया जाएगा। इस ‘फोन करके बुलाया जाएगा’ के इंतजार में हफ्तों-महीनों बीत जाते हैं, और अब तो कई आवेदकों को यह कहकर लौटाया जा रहा है कि “आपकी आवेदन की समय सीमा समाप्त हो गई है, अब आपको फिर से नया आवेदन लगाना होगा।”
जनता का सीधा आरोप है कि यह प्रशासनिक उदासीनता और टालमटोल की नीति नागरिकों को बेवजह परेशान करने के लिए है। जब एक बार लोक सेवा केंद्र से विधिवत रसीद कट चुकी है और आवेदन जमा हो चुका है, तो नगर पालिका का यह दायित्व है कि वह निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदक को बुलाकर कनेक्शन की फीस जमा करवाए और कनेक्शन उपलब्ध कराए। बार-बार समय सीमा खत्म होने का बहाना बनाकर नागरिकों को दोबारा आवेदन के लिए मजबूर करना, सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और कार्य में पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है।
स्थानीय निवासियों ने यह भी शिकायत की है कि इस पूरी प्रक्रिया में कथित दलाल सक्रिय हैं, जो नगरपालिका कर्मचारियों के साथ मिलकर काम करते हैं और सीधे व आसान कनेक्शन के नाम पर आम जनता से अवैध वसूली करते हैं। जो नागरिक इन दलालों के माध्यम से नहीं जाना चाहते, उन्हें जानबूझकर परेशान किया जाता है और उनके वैध आवेदनों को लटकाया जाता है।
यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और ‘ईज़ ऑफ़ लिविंग’ के सरकारी दावों को खोखला साबित करती है। नगर पालिका प्रशासन को इस गंभीर अनियमितता पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। लोक सेवा केंद्र और नगरपालिका के बीच समन्वय की कमी को दूर किया जाना चाहिए, और एक बार आवेदन कर चुके नागरिकों को बिना किसी अतिरिक्त परेशानी के नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इसके साथ ही, इस पूरे मामले में संलिप्त कर्मचारियों और दलालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि जनता को बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिल सके और जल जैसी मूलभूत सुविधा के लिए उन्हें प्रताड़ित न होना पड़े।