
रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां 9783029649
तीर्थराज विमलकुण्ड पर आश्विन मास में ब्रज परिक्रमार्थीयों का दर्शनार्थ सैलाब आया
कामां डीग जिले क़े कामवन धाम में आश्विन मास अमावस्या को आये हजारों श्रद्धालु
तीर्थराज विमलकुण्ड पर आश्विन मास में ब्रज परिक्रमार्थीयों का दर्शनार्थ सैलाब आया हुआ है । असम ,गुजरात,पश्चिम बंगाल व उड़ीसा के श्रद्धालुओं ने की कामवन के तीर्थस्थलों के दर्शन ,पूजन ,आचमन व स्नान।
कामवन के तीर्थस्थलों का माहात्म्य सेवाधिकारी संजय लवानियां ने सुनाते हुए बताया कि वराह पुराण कहता है पृथ्वी पर 66 अरब तीर्थ हैं और वे सभी चातुर्मास में ब्रज में आकर निवास करते हैं। यही वजह है कि व्रज यात्रा करने वाले इन दिनों यहाँ खिंचे चले आते हैं। हज़ारों श्रद्धालु ब्रज के वनों में डेरा डाले रहते हैं।ब्रजभूमि की यह पौराणिक यात्रा हज़ारों साल पुरानी है। चालीस दिन में पूरी होने वाली ब्रज चौरासी कोस यात्रा का उल्लेख वेद-पुराण व श्रुति ग्रंथसंहिता में भी है। कृष्ण की बाल क्रीड़ाओं से ही नहीं, सत युग में भक्त ध्रुव ने भी यही आकर नारद जी से गुरु मन्त्र ले अखंड तपस्या की व ब्रज परिक्रमा की थी।त्रेता युग में प्रभु राम के लघु भ्राता शत्रुघ्न ने मधु पुत्र लवणासुर को मार कर ब्रज परिक्रमा की थी। गली बारी स्थित शत्रुघ्न मंदिर यात्रा मार्ग में अति महत्व का माना जाता है।द्वापर युग में उद्धव जी ने गोपियों के साथ ब्रज परिक्रमा की।कलि युग में जैन और बौद्ध धर्मों के स्तूप बैल्य संघाराम आदि स्थलों के सांख्य इस परियात्रा की पुष्टि करते हैं।14वीं शताब्दी में जैन धर्माचार्य जिन प्रभु शूरी की में ब्रज यात्रा का उल्लेख आता है।15वीं शताब्दी में माध्व सम्प्रदाय के आचार्य मघवेंद्र पुरी महाराज की यात्रा का वर्णन है तो 16वीं शताब्दी में महाप्रभु वल्लभाचार्य, गोस्वामीविट्ठलनाथ, चैतन्य मत केसरी चैतन्य महाप्रभु, रूप गोस्वामी, सनातन गोस्वामी, नारायण भट्ट, निम्बार्क संप्रदाय के चतुरानागा आदि ने ब्रज यात्रा की थी।
ब्रजयात्रियों ने कामवन क़े मुख्य मन्दिर
विमल बिहारी जी क़े दर्शन कर तीर्थराज विमल कुण्ड की परिक्रमा ,आचमन व दर्शन किये ।