
पवन श्रीवास्तव,-8982713738
हुबहु पैकिंग से फैला नकली तेल का साम्राज्य
कटनी में 10–12 साल से चल रहा खेल, असली और नकली में फर्क करना मुश्किल
कटनी।
कटनी जिले में चल रहे नकली तेल के गोरखधंधे का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि इसमें ब्रांडेड कंपनियों की हुबहु पैकिंग तैयार की जाती रही। दिखने में इतना समान कि दूर से पहचानना लगभग नामुमकिन। यही कारण है कि पिछले एक दशक से ज्यादा समय से लाखों उपभोक्ता यह समझ ही नहीं पाए कि वे असली नहीं बल्कि मिलावटी तेल खा रहे हैं।
ब्रांडेड जैसा नाम और पेकिंग
मुरैना से आने वाले टैंकरों में सरसों और पाम ऑयल का मिश्रण भरकर लाया जाता था। फिर फैक्ट्री में इसे “महासुख”, “सूर्या”, “रेंज” और “गुलदस्ता” जैसे नामों से पैक किया जाता। पैकेट्स पर डिजाइन, लोगो और रंग-रूप इतने मिलते-जुलते बनाए जाते कि असली और नकली में फर्क करना आम उपभोक्ता तो दूर, कई दुकानदार भी नहीं कर पाते थे।
ग्रामीण और छोटे कस्बे बने निशाना
इन नकली पैकेट्स को खासतौर पर ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों में सप्लाई किया जाता। वहां न तो उपभोक्ता ब्रांड की बारीकी से जांच कर पाते और न ही प्रशासन की निगरानी इतनी सक्रिय रहती। नतीजा यह हुआ कि सालों तक लोग अपने घरों में जहर समझकर नहीं बल्कि सरसों तेल समझकर मिलावटी तेल का उपयोग करते रहे।
फैक्ट्री में मिली असली जैसी पैकिंग मशीनें
24 फरवरी 2025 को छापेमारी के दौरान जब प्रशासनिक टीम फैक्ट्री में पहुंची तो वहां बड़े पैमाने पर हुबहु पैकिंग मशीनें मिलीं। असली जैसी प्लास्टिक पाउच, डिब्बे, रैपर और सीलिंग यूनिट देखकर जांच दल भी हैरान रह गया। यह साफ हो गया कि पूरी साजिश इस तरह रची गई थी कि उपभोक्ता कभी असली-नकली का फर्क ही न कर सके।
प्रशासन की ढिलाई, माफिया की कमाई
चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी फैक्ट्री और नकली पैकिंग का नेटवर्क सालों तक फलता-फूलता रहा, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने कभी सख्त कार्रवाई नहीं की। मिलीभगत और ढिलाई के कारण यह गोरखधंधा अरबों रुपये तक पहुँच गया और जनता की सेहत लगातार खतरे में पड़ती रही।