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म्योहर गांव में बने गौशाला में लापरवाही से कई दिनों से लगातार गौवंश की मौत, मानवता पर उठ रहे सवाल

म्योहर गांव में बने गौशाला में लापरवाही से कई दिनों से लगातार गौवंश की मौत, मानवता पर उठ रहे सवाल

संवाददाता: प्रभाकर मिश्र/ अखंड भारत न्यूज़

कौशाम्बी।कौशाम्बी जिले के म्योहर गांव में गौशाला के गौवंश की दुर्दशा ने मानवता के समक्ष एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। यहां की गौशाला के केयर टेकरों की लापरवाही और ग्राम प्रधान की अनदेखी के कारण दर्जनों गौवंश की जान जा चुकी है। स्थानीय निवासियों और गौशाला के केयर टेकरों के मुताबिक, गौवंश को न तो समय पर इलाज मिलता है और न ही उन्हें उचित आहार। पशु चिकित्सक नियमित रूप से नहीं आते, जिसके कारण गौवंश की स्थिति और भी बदतर हो गई है।

सूत्रों का कहना है कि गौशाला में मौजूद जानवरों को सही देखभाल नहीं मिल रही है। अधिकांश पशु भूख और बीमारियों के कारण मर रहे हैं, और उनका शव लावारिस रूप से खुले में फेंक दिया जाता है, जिसे कुत्ते खा जाते हैं। यह घटनाएं न केवल गौवंश की तंग हालत को दर्शाती हैं, बल्कि इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन की लापरवाही और मानवीय मूल्यों की भी पोल खोलती हैं।

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सूत्रों की माने तो ग्राम प्रधान अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह अनजान हैं और न तो गौशाला की देखभाल करते हैं और न ही ग्राम पंचायत के अन्य कार्यों में कोई रुचि दिखाते हैं और अगर इस पर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई तो यह मानवता के लिए एक काला धब्बा साबित होगी।

गांव वासियों ने यह भी कहा कि अगर इस मुद्दे को तुरंत हल नहीं किया गया, तो यहां की गौशाला की हालत और भी दयनीय हो सकती है। गौवंश की उचित देखभाल के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ग्राम प्रधान से सवाल उठ रहे हैं। अब यह सवाल उठता है कि इस घोर लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है—ग्राम प्रधान, सचिव या कोई और अधिकारी?

इस मामले में अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि गौशाला में गौवंश को सही देखभाल मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

 

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