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बुंदेलखंड की शान हरे भरे पेड़ो के दुश्मन बने इंसान ने अंधाधुंध कटाई करके पर्यावरण व परिवेश के लिए बना लिया खतरा

बुंदेलखंड की शान हरे भरे पेड़ो के दुश्मन बने इंसान ने अंधाधुंध कटाई करके पर्यावरण व परिवेश के लिए बना लिया खतरा

बुंदेलखंड की शान हरे भरे पेड़ो के दुश्मन बने इंसान ने अंधाधुंध कटाई करके पर्यावरण व परिवेश के लिए बना लिया खतरा

 

 

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हमीरपुर। शासन द्वारा पर्यावरण को संरक्षण के लिए और जिले को हरा भरा बनाने के लिए प्रत्येक वर्ष करोड़ों रुपए खर्च करती है। लेकिन वनाधिनियम का जिले में खुलेआम उल्लंघन करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में हरे भरे वनों की कटान बड़ी तेजी से की जा रही है। लेकिन अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए लकड़ी काटने वाली मशीन से दिन रात हरे भरे पेड़ो को काटकर जिले से अन्य जनपद में भेजकर चांदी काट रहे है। ऐसा ही मामला कस्बा राठ क्षेत्र से सामने आया है। जहां लकड़ी माफियाओं द्वारा ग्रामीण क्षेत्र से हरे भरे वनों को मिनटों में मशीन से काटकर ट्रैक्टर ट्राली में भरकर दिन रात राठ कस्बा के उरई रोड स्थित क्राइस्ट कॉन्वेंट स्कूल के पास, काशीराम कालोनी और मलोहा रोड पर बड़े पैमाने पर लकड़ियों को डंप किया जाता है। और प्रत्येक दिवस 15 से 20 भारी भारी ट्रको में लड़की भरकर जिले से बाहर भेजी जा रही है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि एक दिन में कितने पेड़ो को नष्ट किया जा रहा है। और पूरे जनपद में बड़े पैमाने पर लकड़ी काटने का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। लेकिन चन्द पैसों के लिए और अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सरकार का लक्ष्य और उद्देश्य, पूरा होता नही दिखाई दे रहा है। जिले के अधिकारियों का कहना है कि पेड़-पौधों को बचाने के साथ-साथ वन संपदा की सुरक्षा के लिए विभाग तत्परता से काम कर रहा है। और वन अधिनियम का उल्लंघन करने वालो पर कठोर कार्रवाई की जायेगी। लेकिन एक लम्बे सिस्टम के चलते बीते एक साल से पेड़ो को काटकर मैदान बनाया जा रहा है। लेकिन कार्यवाही के नाम पर अधिकारी सिर्फ खाना पूर्ति करते नजर आ रहे हैं। प्रशासन लकड़ी व्यापारियों से सांठ गांठ के चलते यदि व्यापार इसी तरह से चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब घने जंगल बंजर भूमि में बदल जाएंगे। इसलिए शासन प्रशासन को चाहिए की जल्द से जल्द लकड़ी के अवैध कारोबार सहित दी गई लकड़ियों की छूट पर अंकुश लगाया जाए। और जो भी अधिकारी इसमें संलिप्त पाए जाते है तो उन अधिकारियो पर भी कार्यवाही होनी चाहिए। अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि सरकार के द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए किया जा रहा प्रयास कितना सफल है। हरे पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए जिम्मेदार अधिकारी अपनी आंखें बंद किए बैठे हैं। सूचना देने के बाद भी थाना पुलिस और वन विभाग कार्यवाही करने को तैयार नहीं हैं। सूत्रों की माने तो स्थानीय प्रशासन लकड़ी माफियाओं से मोटी रकम वसूल रहे हैं। जो कि क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इसके साथ साथ छूट पर काटी जा रही लकड़ी के पीछे रात के अंधेरे में प्रतिबंधित लकड़ी भी काटी जा रही है। जिसको रातों रात ट्रेको में भरकर अन्य जनपदों में भेज दी जाती है। यदि इसी तरह हाल रहा तो अभी तक तो सिर्फ 46 डिग्री ही तापमान पहुंचा है लोग बढ़ते तापमान को सहन भी नही कर सकेंगे। और आगे चलकर एक समय ऐसा आएगा जब हम सभी लोग ऑक्सीजन के सिलेंडर साथ में लेकर चलेंगे। पर्यावरण संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया है। जिसके चलते कुछ सालो से बारिश होना कम हो गई है। और इसी वजह से पानी कई फुट नीचे चला गया है। निश्चित रूप से यदि जल्द से जल्द शासन प्रशासन द्वारा इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। तो आने वाला समय हम सभी के लिए बहुत बड़ा संकट पैदा कर देगा।

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