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65 साल बाद बदलेगा भारत का खनन कानून: अब AI करेगा निगरानी, लक्ष्य होगा ‘जीरो एक्सीडेंट’डीजीएमएस ने तैयार किया नए नियमों का मसौदा, वैज्ञानिक खनन, डिजिटल मॉनिटरिंग और श्रमिक सुरक्षा को मिलेगी सर्वोच्च प्राथमिकता।

धनबाद : भारत के खनन और तेल क्षेत्र में 65 साल बाद सबसे बड़ा नियामकीय बदलाव होने जा रहा है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) ने खनन नियमों में व्यापक संशोधन का मसौदा तैयार कर लिया है। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार हुआ, तो वर्ष 2026 के अंत तक नए नियम लागू हो जाएंगे।नए नियमों का मुख्य उद्देश्य खदानों में ‘जीरो एक्सीडेंट विजन’ को लागू करना है। इसके तहत आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल मॉनिटरिंग और वैज्ञानिक खनन को कानूनी मान्यता दी जाएगी, जिससे दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके और श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

_____तीन सेक्टरों के लिए अलग-अलग नियम____

डीजीएमएस ने कोयला खदान, धातु खदान और तेल एवं गैस क्षेत्र के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ समितियां बनाई हैं। इन समितियों की प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार हो चुकी है और अंतिम मसौदे पर काम जारी है। नए नियम चारों लेबर कोड के अनुरूप तैयार किए जा रहे हैं।

_____अब AI और ड्रोन संभालेंगे सुरक्षा_______

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नए नियमों के तहत खदानों में आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। इनमें शामिल हैं—AI आधारित जोखिम आकलन,ड्रोन से सर्वेक्षण और निरीक्षण ,रियल टाइम गैस मॉनिटरिंग,डिजिटल सेफ्टी ऑडिट,जियोटेक्निकल मॉनिटरिंग,रिमोट कंट्रोल मशीनें,ऑटोमेटेड ड्रिलिंग और लोडिंग सिस्टम,अर्ली वार्निंग सिस्टम

_____हर खदान में डिजिटल निगरानी________

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक खदान में रियल टाइम मॉनिटरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे। श्रमिकों के स्वास्थ्य की डिजिटल निगरानी होगी, नियमित प्रशिक्षण अनिवार्य होगा और गुणवत्ता वाले सुरक्षा उपकरणों का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

_____ मानकों के अनुरूप होंगे नियम__

डीजीएमएस ने ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों की खनन सुरक्षा प्रणालियों का अध्ययन किया है। इन्हीं मानकों के आधार पर भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप नया ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, जोखिम प्रबंधन और आपदा से निपटने की बेहतर व्यवस्था शामिल होगी।

_____तेल और गैस क्षेत्र को भी मिलेगा लाभ______

नए नियम केवल कोयला और धातु खदानों तक सीमित नहीं रहेंगे। देश के ऑनशोर और ऑफशोर तेल एवं गैस क्षेत्रों में भी आधुनिक सुरक्षा मानकों को लागू किया जाएगा, जिससे उच्च जोखिम वाले कार्य अधिक सुरक्षित बन सकें।

_____उत्पादन के साथ सुरक्षा पर बराबर जोर______

सरकार का मानना है कि लौह अयस्क, कोयला, बाक्साइट, तांबा, जस्ता और सोना जैसे खनिजों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए वैज्ञानिक खनन आवश्यक है। नए नियम उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ श्रमिकों की सुरक्षा और कार्यस्थल की गुणवत्ता को भी मजबूत करेंगे।

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