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बजरंग दल का हर कार्यकर्ता राष्ट्रधर्म के लिए समर्पित

समाज में सांस्कृतिक जागरण का दिया संदेश



रिपोर्टर : दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597

मनावर। जिला धार।। विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल द्वारा शीतकालीन शौर्य प्रशिक्षण वर्ग का भव्य, गरिमामय एवं अनुशासित आयोजन संचालित किया जा रहा हैं। इस आयोजन में प्रातः कालीन सत्र में मंचासीन मुख्य अतिथि बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक किशन प्रजापति ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि समाज की सुरक्षा, सांस्कृतिक चेतना एवं राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व निभाने में विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से देश-विरोधी नैरेटिव के प्रति सजग रहने, आत्मचिंतन को जीवन का अंग बनाने तथा धर्म, ज्ञान और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय संयोजक ने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति को दुनिया की सबसे प्राचीन, समृद्ध और श्रेष्ठ संस्कृति बताते हुए कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है उन्होंने कहा कि जो धारण किया जाता है, वही धर्म कहलाता है। उन्होंने भगवान श्रीराम द्वारा माता सीताजी की मर्यादा और सुरक्षा के उदाहरण को प्रस्तुत करते हुए कहा कि हिंदू धर्म में नारी को सदैव देवी स्वरूप माना गया है। नारी सम्मान भारतीय संस्कृति की आत्मा है।

*यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः* (जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ देवता वास करते हैं।) उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू संस्कृति में नारी को नारायणी, शक्ति और सृजन का स्वरूप माना गया है और उसका सम्मान ही समाज की उन्नति का आधार है।

मुख्य अतिथि ने श्रीराम और श्रीकृष्ण के आदर्शों, वसुधैव कुटुम्बकम के जीवन-दर्शन तथा कण-कण में ईश्वर की भावना को भारतीयता की पहचान बताया। उन्होंने कहा कि मैकाले की शिक्षा पद्धति ने भारतीय गुरुकुल परंपरा से समाज को दूर करने का प्रयास किया, जबकि नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालय ज्ञान के महान केंद्र थे। उनके विनाश से भारत को अपूरणीय क्षति पहुँची, इसलिए युवाओं को अपनी जड़ों और संस्कृति को जानना अत्यंत आवश्यक है। इतिहास के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि भारत सोने की चिड़िया था, हैं और हमेशा रहेगा। महाराणा प्रताप जी, छत्रपति शिवाजी महाराज, बप्पा रावल जी जैसे महावीरों के शौर्य, राष्ट्रधर्म की रक्षा के लिए दिए गए बलिदानों, सोमनाथ व काशी जैसे तीर्थों पर हुए आक्रमणों तथा मंदिरों की रक्षा हेतु जन-समर्पण ने भारतीय आत्मगौरव को जीवित रखा है। भारत विश्व का एकमात्र देश है जो अपनी मातृभूमि को माता के रूप में पूजता है। सेवा-भाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गोसेवा, गौशालाओं का संचालन, भंडारे-लंगर, प्रकृति का सम्मान, परोपकार भारतीय संस्कृति की पहचान हैं। बजरंग दल द्वारा प्रतिवर्ष लाखों पौधों का रोपण किया जाता हैं तथा प्रकृति से प्रेम के प्रति अमृता देवी विश्नोई सहित 127 बलिदानियों का उदाहरण प्रकृति संरक्षण की प्रेरक मिसाल है बताया गया। अहिंसा परमो धर्म लेकिन धर्म की रक्षा के लिए धर्म हिंसा तदैव च धर्म-रक्षा हेतु शौर्य का संतुलन भी भारतीय परंपरा का मूल तत्व है।

इस अवसर पर प्रांत संयोजक नितिन पाटीदार, विभाग संगठन मंत्री सुरेश गुर्जर, प्रांत सह संयोजक यश बच्चानी, प्रांत सह संयोजक मुकेश पाटीदार, प्रांत बलोपासना प्रमुख कमल सिंह पंवार, प्रांत गौरक्षा प्रमुख भैरूलाल एवं विभाग, जिले, प्रखंड तक के अधिकारी भी उपस्थित थे। यह प्रशिक्षण वर्ग विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल प्रांत संगठन मंत्री खगेंद्र भार्गव के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। जो कि सभी युवाओं के प्रेरणास्त्रोत है। कार्यक्रम का मंच संचालन प्रांत साप्ताहिक मिलन प्रमुख एवं वर्ग के बौद्धिक प्रमुख मंगलेश सोनी ने किया। आयोजन में जिले के समाजसेवी सदाशिव बरफा भी विशिष्ठ अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अंत में वक्ताओं ने युवाओं से आह्वान किया कि वे भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा (जिसे विश्व की भाषाओं की जननी माना गया है), सेवा-भाव, मानवता, दया और धर्म के मूल्यों को आत्मसात कर अखंड भारत की सांस्कृतिक कल्पना को साकार करने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

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