
रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597
मनावर। जिला धार।। ग्राम वायल में आयोजित संकल्पित पंचम श्रीमद् भागवत कथा के सातवें (अंतिम) दिन मुख्य रूप से सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष और भागवत कथा के समापन प्रसंगों का व्यासपीठ से वर्णन किया गया। भगवान श्री कृष्ण की निस्वार्थ मित्रता, भक्तों पर कृपा और मृत्यु के भय से मुक्ति का संदेश देता है। 
पंडित प्रवीण शर्मा राधे भैय्या ने सुदामा चरित्र (सच्ची मित्रता) का वर्णन करते हुए भगवान कृष्ण और उनके गरीब मित्र सुदामा का मिलन, कृष्ण द्वारा सुदामा के चरण धोना, और बिन मांगे सुदामा की दरिद्रता दूर कर उन्हें महल देने का प्रसंग सुनाया। शुकदेव जी द्वारा राजा परीक्षित को सात दिन की कथा का सार सुनाना।
तक्षक नाग द्वारा डसने के बाद परीक्षित का निर्भय होकर भगवान के परमधाम को जाना और कथा के अंत में भागवत के महत्व, कलयुग में नाम संकीर्तन और मोक्ष के मार्ग विस्तार से वर्णन किया गया।
श्रीमद् भागवत कथा के सात दिन भक्तों को सिखाता है कि भगवान प्रेम और भक्ति के भूखे हैं, और उनके दरबार में सच्चे मन से जाने पर भक्त का कल्याण निश्चित है।
श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन कथा वाचक पंडित प्रवीण शर्मा राधे भैय्या ने विभिन्न प्रसंगों पर प्रवचन दिए। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की अलग अलग लीलाओं का वर्णन किया। मां देवकी के कहने पर छह पुत्रों को वापस लाकर मां देवकी को वापस देना, सुभद्रा हरण का आख्यान कहना एवं सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कथा व्यासपीठ से बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए। यह भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा से समझा जा सकता है। सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र कृष्ण से मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। सुदामा ने द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे लेकिन द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं, इसपर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है। जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना सुदामा सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे। सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया। दोनों की ऐसी मित्रता देखकर सभा में बैठे सभी लोग अचंभित हो गए। कृष्ण सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाया। उन्हें कुबेर का धन देकर मालामाल कर दिया। जब भी भक्तों पर विपदा आई है। प्रभु उनका तारण करने अवश्य आए हैं।
सातवें दिवस की कथा की पूर्व संध्या पर हास्य व्यंग कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जो देर रात तक चला। मंच से कविता पाठ किया गया। भारी तादाद में श्रोताओं ने हिस्सा लिया।
ग्राम वायल में आयोजित सात दिवसीय कथा सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। अंत में श्रीमद् भागवत भगवान की महाआरती कर महाप्रसादी का वितरण किया गया।
आयोजक समिति द्वारा कथा वाचक पंडित प्रवीण शर्मा राधे भैय्या, गणमान्यजनों, जनप्रतिनिधियों और कार्यक्रम के सहयोगियों का सम्मान किया गया।
रामनवमी के पावन पर्व पर 27 मार्च शनिवार को आयोजक समिति द्वारा कन्याभोज और भंडारे का आयोजन किया गया है।
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