
बाजारों में खोई रौनक लौटी। जमकर की गई खरीददारी
रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597
मनावर। जिला धार।। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का पर्व श्रद्धाभाव से मनाया गया। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निराहार व्रत रखती है। प्रातःकाल स्नान उपरांत सुंदर वस्त्र धारण कर, हाथों में मेंहंदी लगाई जाती है। अपने पति की लंबी उम्र, आरोग्य व सौभाग्य के लिए स्त्रीयाँ चंद्रोदय तक निराहार रहकर भगवान शिव-पार्वती, कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रदेव का पूजन करने के लिए बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी बनाकर उपरोक्त सभी देवों को स्थापित किया जाता है। विधि-विधान से पूजा करने के साथ करवा चौथ की कथा पोथी सुनने मंदिर पहुंची। जहां श्रद्धाभाव से पूजन अर्चन किया। मान्यता है कि करवा चौथ पर जो महिला कथा पढ़ती है या फिर सुनती है, तो उसे शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
इस करवा चौथ व्रत पर्व को लेकर बाजार में भी रंगत दिखाई दी। महिलाओं द्वारा विशेष खरीदी करते हुए साड़ी, कटलरी, सोना चांदी के आभूषण, कॉस्मेटिक समान की जमकर खरीददारी की। मिठाई और फलों की खूब बिक्री हुई। ब्यूटी पार्लर में भी श्रृंगार के लिए महिलाएं पहुंची। देर रात्रि को चांद निकलने पर विशेष पारंपरिक सुंदर परिधान पहनकर विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश एवं अपने पति की पूजा अर्चना कर तिलक लगाकर चलनी में दीप जलाकर चांद व अपने पति का चेहरा देखकर अपना व्रत उपवास का पारणा अपने पति के हाथों से मुंह मीठा करा कर व जल पीकर किया। पतिदेव ने अपनी अर्धांगिनी को उपहार भेट किए।
करवाचौथ से दीपावली की खरीदी शुरू हो जाती है। निरंतर बारिश के कारण खेती किसानी का कार्य इस वर्ष पिछड़ गया। किसान मजदूर वर्ग खेती कार्य में व्यस्त होने के कारण कई दिनों से बाजारों में सन्नाटा छाया था। मगर करवा चौथ से बाजारों की खोई रौनक लौट आई। बाजार सज गए। व्यापारियों में भारी उत्साह है।
रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597
मनावर। जिला धार।। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का पर्व श्रद्धाभाव से मनाया गया। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निराहार व्रत रखती है। प्रातःकाल स्नान उपरांत सुंदर वस्त्र धारण कर, हाथों में मेंहंदी लगाई जाती है। अपने पति की लंबी उम्र, आरोग्य व सौभाग्य के लिए स्त्रीयाँ चंद्रोदय तक निराहार रहकर भगवान शिव-पार्वती, कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रदेव का पूजन करने के लिए बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी बनाकर उपरोक्त सभी देवों को स्थापित किया जाता है। विधि-विधान से पूजा करने के साथ करवा चौथ की कथा पोथी सुनने मंदिर पहुंची। जहां श्रद्धाभाव से पूजन अर्चन किया। मान्यता है कि करवा चौथ पर जो महिला कथा पढ़ती है या फिर सुनती है, तो उसे शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
इस करवा चौथ व्रत पर्व को लेकर बाजार में भी रंगत दिखाई दी। महिलाओं द्वारा विशेष खरीदी करते हुए साड़ी, कटलरी, सोना चांदी के आभूषण, कॉस्मेटिक समान की जमकर खरीददारी की। मिठाई और फलों की खूब बिक्री हुई। ब्यूटी पार्लर में भी श्रृंगार के लिए महिलाएं पहुंची। देर रात्रि को चांद निकलने पर विशेष पारंपरिक सुंदर परिधान पहनकर विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश एवं अपने पति की पूजा अर्चना कर तिलक लगाकर चलनी में दीप जलाकर चांद व अपने पति का चेहरा देखकर अपना व्रत उपवास का पारणा अपने पति के हाथों से मुंह मीठा करा कर व जल पीकर किया। पतिदेव ने अपनी अर्धांगिनी को उपहार भेट किए।
करवाचौथ से दीपावली की खरीदी शुरू हो जाती है। निरंतर बारिश के कारण खेती किसानी का कार्य इस वर्ष पिछड़ गया। किसान मजदूर वर्ग खेती कार्य में व्यस्त होने के कारण कई दिनों से बाजारों में सन्नाटा छाया था। मगर करवा चौथ से बाजारों की खोई रौनक लौट आई। बाजार सज गए। व्यापारियों में भारी उत्साह है।