
श्री क्षेत्र शुक्रताल (अनिलकुमार पालीवाल)
किसी भी धार्मिक व आध्यात्मिक दर्शन और तीर्थयात्रा में चैतन्य का आभामंडल होता है और तीर्थाटन व पौराणिक कथा श्रवण से प्राप्त होने वाला जीवन का आनंद दुगना हो जाता है, ऐसा प्रतिपादन सुप्रसिद्ध संतश्री पंडित हरि नारायण वैष्णव ने श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर बोलते हुए किया।
माँ आशापूर्णा भक्त समूह व पालीवाल महाजन समाज की ओर से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के आज के अंतिम दिन सर्वप्रथम श्री झाडोत परिवार की ओर से भगवान की आरती संपन्न हुई।
तीर्थयात्रा और धार्मिक उपक्रमों के बाद सीधे घर न जाएँ, उससे पहले ग्रामदेवता के दर्शन अवश्य करें और घर में प्रवेश करते समय परिवार के ज्येष्ठजनों का आशीर्वाद प्राप्त करें, ऐसा भी पंडित हरि नारायणजी ने कहा।
सुदामा मिलन कथा
भगवान श्रीकृष्ण और मित्रता के दृढ़ प्रतीक माने गए सुदामा ब्राह्मण की मित्रता की कथा विस्तार से सुनाई। इस अवसर पर श्रीमद्भागवत कथा का मूलपाठ और हवन भी संपन्न किया गया।
गौरवपत्र प्रदान
कथा के मुख्य यजमान व संयोजन समिति की ओर से सभी उपस्थित महानुभाव भक्तों को प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह संतश्री पंडित वैष्णव के शुभहस्तों से प्रदान किए गए।
साथ ही “महाराष्ट्र सनातन धर्म रक्षा प्रतिष्ठान” की ओर से कथा वाचक संतश्री हरिनारायणजी वैष्णव, आयोजन समिति संरक्षक श्री राजेंद्र झाडोत तथा माँ आशापूर्णा भक्त समूह के प्रमुख कार्यकर्ताओं का महाराष्ट्र प्रदेश संयोजक अनिलकुमार पालीवाल, वरिष्ठ मार्गदर्शक डॉ. शंभूलाल पालीवाल, महिला आघाड़ी प्रमुख श्रीमती किरण पालीवाल आदि मान्यवरों के हाथों “धर्माधिष्ठित धर्म रत्न” पुरस्कार देकर सम्मान किया गया।
इस अवसर पर वरिष्ठ कार्यकर्ता श्री मोहनलाल पालीवाल (नेपानगरवाले, इंदौर), श्रीकृष्ण पालीवाल (भगवानपुरा), शांतीलालजी पालीवाल (मंदसौर), पुरुषोत्तमजी पालीवाल (प्रतापगढ़), विलास पालीवाल (चोपड़ा), महेंद्र पालीवाल (बुरहानपुर) आदि मान्यवर तथा सैकड़ों भक्त उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की सफलता के लिए ललित पालीवाल, कृष्णमुरारी पालीवाल, दीपक पालीवाल, विनोद पालीवाल, प्रदीप पालीवाल, राजेंद्र पालीवाल, अखिलेश पालीवाल तथा समूह के सभी कार्यकर्ताओं ने परिश्रम किए।


