*एक्सपायरी दवा का खेल? मरीज की बिगड़ी हालत, सात दिन जिला अस्पताल में चला इलाज; स्वस्थ होते ही पीड़ित ने खोला पलक मेडिकल स्टोर के खिलाफ खोला गया पोल*
*डबल इंजन सरकार में अवैध दवा की बिक्री जनता का आक्रोश कब मिलेगा पीड़ित परिवार को न्याय पीड़ित संत कुमार गिरी*
*जनपद मिर्जापुर*
मिर्जापुर विकासखंड पहाड़ी के टेढ़ा हिनौती के पलक मेडिकल स्टोर पर गंभीर आरोप, संचालक संदीप कुमार कोरी उर्फ योगेंद्र कोरी के खिलाफ जांच, लाइसेंस निरस्त करने और कानूनी कार्रवाई की मांग
मिर्जापुर। दवा इंसान की जिंदगी बचाने के लिए होती है, लेकिन यदि किसी मरीज को कथित तौर पर एक्सपायरी दवा थमा दी जाए तो यह मामला महज लापरवाही नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी से जुड़ा बेहद गंभीर सवाल बन जाता है। पड़री थाना क्षेत्र के टेढ़ा हिनौती स्थित पलक मेडिकल स्टोर को लेकर ऐसा ही एक गंभीर मामला सामने आया है।
ग्राम निवासी संत कुमार गिरी पुत्र स्वर्गीय राज किशोर गिरी ने संबंधित अधिकारियों को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि पलक मेडिकल स्टोर से उसे ऐसी दवाएं दी गईं, जिनमें इलेक्ट्राल और पैन-डी कैप्सूल कथित तौर पर एक्सपायरी थे। शिकायतकर्ता का कहना है कि दवाओं का सेवन शुरू करने के बाद उसकी हालत में सुधार होने के बजाय तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई और अंततः उसे जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराना पड़ा।
पीड़ित के अनुसार, करीब सात दिन तक अस्पताल में भर्ती रहकर उपचार कराने के बाद जब उसकी तबीयत में सुधार हुआ, तब उसने पूरे मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों को लिखित प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की।
14 सितंबर को बिगड़ी तबीयत, डॉक्टर से कराया इलाज
शिकायतकर्ता के प्रार्थना पत्र के मुताबिक 14 सितंबर 2026 को उसकी तबीयत अचानक खराब हो गई। इसके बाद वह पड़री बाजार में चिकित्सक डॉ. बीके शर्मा के पास पहुंचा। चिकित्सक की सलाह पर सीबीसी, मलेरिया, टाइफाइड आदि की जांच कराई गई।
जांच के आधार पर चिकित्सक ने दवाएं लिखीं। शिकायतकर्ता का कहना है कि डॉक्टर की पर्ची लेकर वह टेढ़ा हिनौती स्थित पलक मेडिकल स्टोर पर पहुंचा, जहां से उसे दवाएं उपलब्ध कराई गईं।
प्रार्थना पत्र में 300 एमएल की दवा, ग्लूकोज टैबलेट 200 एमजी, पैन-डी कैप्सूल, इलेक्ट्राल ओआरएस तथा विटामिन की दवा दिए जाने का उल्लेख किया गया है।
दवा शुरू करने के बाद बिगड़ती चली गई हालत
शिकायतकर्ता के अनुसार उसने 15 सितंबर की सुबह से दवाओं का सेवन शुरू किया। निर्धारित दवा लेने के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। शिकायत के मुताबिक उसी दिन रात में उसकी तबीयत और ज्यादा बिगड़ने लगी।
इसके बाद 16 सितंबर की सुबह दवा लेने के बावजूद हालत सुधरने के बजाय और खराब होती चली गई। स्थिति गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया।
पीड़ित का कहना है कि अस्पताल में चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार चला और उसे करीब सात दिनों तक भर्ती रहना पड़ा। उपचार के बाद जब उसकी हालत में सुधार हुआ तो उसने पूरे मामले को अधिकारियों के संज्ञान में लाने का फैसला किया।
अस्पताल में सामने आई कथित एक्सपायरी दवा की बात
मामले का सबसे गंभीर पहलू शिकायतकर्ता द्वारा लगाया गया वह आरोप है, जिसमें कहा गया है कि उपचार के दौरान उसे बताया गया कि मेडिकल स्टोर से दी गई दवाओं में इलेक्ट्राल और पैन-डी कैप्सूल एक्सपायरी थे।
यहीं से मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है—
क्या मेडिकल स्टोर में एक्सपायरी दवाओं का स्टॉक रखा गया था?
यदि दवा एक्सपायरी थी तो मरीज को कैसे उपलब्ध कराई गई?
दवा बेचते समय उसकी एक्सपायरी डेट क्यों नहीं देखी गई?
मेडिकल स्टोर के स्टॉक और खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड की जांच हुई या नहीं?
और सबसे महत्वपूर्ण—क्या मरीज की तबीयत बिगड़ने का संबंध इन दवाओं से था?
इन सवालों का जवाब अब विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
मेडिकल स्टोर संचालक पर अवैध दवा बिक्री के भी आरोप
शिकायतकर्ता ने अपने प्रार्थना पत्र में पलक मेडिकल स्टोर के संचालक संदीप कुमार कोरी उर्फ योगेंद्र कोरी पुत्र शिवधन कोरी पर कथित रूप से अवैध दवाओं की बिक्री किए जाने के भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मेडिकल स्टोर की केवल शिकायत में उल्लिखित दवाओं की ही नहीं, बल्कि पूरे स्टॉक की जांच कराई जाए। साथ ही दवाओं के बैच नंबर, निर्माण तिथि, एक्सपायरी तिथि, खरीद के बिल, बिक्री रिकॉर्ड और मेडिकल स्टोर के लाइसेंस की भी जांच की जाए।
हालांकि, अवैध दवा बिक्री से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इन आरोपों की वास्तविकता औषधि विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
सात दिन अस्पताल में भर्ती रहने के बाद उठाई आवाज
इस मामले की खास बात यह है कि शिकायतकर्ता के अनुसार उसने पहले अपनी बीमारी का उपचार कराया। हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती हुआ और करीब सात दिन तक इलाज के बाद स्वास्थ्य में सुधार होने पर अधिकारियों को लिखित शिकायत दी।
प्रार्थना पत्र में पीड़ित ने संबंधित मेडिकल स्टोर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए लाइसेंस निरस्त करने तथा कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
औषधि विभाग की जांच से खुलेगा राज
अब इस पूरे मामले में औषधि विभाग और संबंधित अधिकारियों की जांच सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि विभाग मेडिकल स्टोर पर छापेमारी या निरीक्षण करता है तो वहां उपलब्ध दवाओं के स्टॉक, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट की जांच से काफी कुछ स्पष्ट हो सकता है।
साथ ही शिकायतकर्ता द्वारा बताई गई दवाओं के बिल, पर्ची, पैकेट/स्ट्रिप, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट की जांच तथा जिला अस्पताल के उपचार संबंधी अभिलेखों का परीक्षण भी मामले की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
यदि जांच में एक्सपायरी दवा बेचने या औषधि संबंधी नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जरूरत होगी।
जनता की निगाह अब अधिकारियों पर
मेडिकल स्टोर से जुड़ी शिकायत सामने आने के बाद अब क्षेत्रीय लोगों की निगाहें स्वास्थ्य विभाग और औषधि निरीक्षक पर टिकी हैं। सवाल यह है कि शिकायत के आधार पर विभाग कितनी गंभीरता से जांच करता है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित मेडिकल स्टोर के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
एक तरफ मरीज सात दिन तक अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराने की बात कह रहा है, दूसरी तरफ मेडिकल स्टोर से कथित एक्सपायरी दवा दिए जाने का आरोप सामने आया है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
