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*ज़ीरो कोल लीकेज अभियान में झारखंड और बंगाल में कई चैलेंज, CISF ने लिखा पत्र*

*ज़ीरो कोल लीकेज अभियान में झारखंड और बंगाल में कई चैलेंज, CISF ने लिखा पत्र*
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा

“जीरो कोल लीकेज अभियान शुरू करने के एक महीने बाद, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने झारखंड और पश्चिम बंगाल में कई बाधाओं की ओर इशारा किया है। बल ने बताया है कि उन्हें कोयला खदान प्रबंधनों से समय पर और पर्याप्त लॉजिस्टिक सहायता नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा मैनपावर की कमी, आवश्यक फंड का अभाव और सीमित कानूनी अधिकारों जैसी समस्याएँ भी सामने आ रही हैं। OSF की फीला टीमों ने इन सभी मुद्दों से अवगत कराने के लिए भारत कोकिंग कील लिमिटेड (BCCL), ईस्टर्न कोलफील्ड्‌स लिमिटेड (ECL), सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) और दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय को पत्र लिखा है। इन तमाम चुनौतियों के बावजूद 4 जुलाई को अभियान शुरू होने के बाद से केंद्रीय बल ने अब तक 6371 मीट्रिक टन से अधिक चोरी का कोयला बरामद किया है, 306 अवैध खदानों की सील किया है और 229 एफआईआर दर्ज की है। CISF को देश के प्रमुख कोयला क्षेत्रों की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया है और हाल ही में गृह मंत्रालय के निर्देशों के तहत केंद्र सरकार ने MMDR अधिनियम, 1957 के तहत तलाशी और

जब्ती करने के अधिकार भी दि हैं। हालांकि, लॉजिस्टिक सहायता की कमी के कारण CISF को कई स्थानों पर छापेमारी को सात से दस दिनों के लिए टालना पड़ा है। इसके साथ ही, छापेमारी के दौरान जब्त किए गए लगभग 200 वाहनों और उपकरणों को सुरक्षित रखने के कोई समर्पित स्थान उपलब्ध नहीं है।प्रशासनिक स्तर पर भी कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। कुछ खदान प्रबंधनों ने एफआईआर दर्ज कराने के आवश्यक ‘एक्ट कंट्रावेशन सर्टिफिकेट’ का प्रारूप जारी नहीं किया है। साथ ही कई जगहों पर पुलिस,वन विभाग और जिला खनन अधिकारियों से समय पर सहयोग नहीं मिल पा रहा है। खदान प्रबंधनों द्वारा माइनिंग इंजीनियर और माइन मैनेजर जैसे तकनीकी अधिकारियों को नामित न किए जाने से भी जांच प्रभावित ही रही है।

बल के सामने संसाधनों और कानूनी सीमाओं की भी चुनौती है। त्वरित कार्रवाई टीम के लिए दैनिक कानूनी के लिए इमर्जेन्सी फंड की भारी कमी है। वर्तमान में केवल राजपत्रित अधिकारी ही कार्रवाई के लिए अधिकृत है, इसलिए CISF ने मांग की है कि एक साथ कई जगहों पर छापेमारी के लिए अधीनस्थ अधिकारियों की भी अधिकार दिए जाएं। इसके अलावा, बल ने अपने क्षेत्राधिकार पर स्पक्षता मांगी है कि क्या उनका अधिकार केवल खदान परिसर तक सीमित है या परिवहन मागों और राजमार्गों पर भी लागू होता है। वहीं, अदालत रांची और चतरा जैसे दूर-दराज के इलाकों में होने के कारण अधिकारियों की नियमित यात्रा से सुरक्षा तैनाती पर भी विपरीत असर पड़ रहा है