बाघमारा/धनबाद। BCCL एरिया क्षेत्र 4 कतरास के रामकनाली ओपी क्षेत्र अंतर्गत केशलपुर कुमारपट्टी में बिट्टू बाबू बंगला रविवार तड़के भू-धंसान की घटना ने एक बार फिर अवैध कोयला खनन और खदान क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर घटना में दो लोगों की मौत होने और कई अन्य के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
वहीं घटना को लेकर सीआईएसएफ, बीसीसीएल धनबाद की ओर से 13 सितंबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि कुछ व्यक्तियों के फंसे होने की आशंका व्यक्त की जा रही है और राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है। घटना की वास्तविक स्थिति और कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी।
हादसे ने फिर उठाया अवैध खनन पर सवाल
बिट्टू बाबू बंगला क्षेत्र में हुए भू-धंसान की घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि क्षेत्र में अवैध खनन की आशंका पहले से मौजूद थी और संबंधित एजेंसियां कार्रवाई कर रही थीं, तो आखिर हादसा होने से पहले इस गतिविधि को पूरी तरह रोका क्यों नहीं जा सका?
सीआईएसएफ की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सीआईएसएफ और बीसीसीएल प्रबंधन द्वारा क्षेत्र में अवैध कोयला खनन की संभावनाओं तथा उससे उत्पन्न जीवन एवं संपत्ति के खतरे को ध्यान में रखते हुए लगातार निवारक एवं प्रवर्तनात्मक कार्रवाई की जा रही थी।
CISF ने गिनाई कार्रवाई, फिर भी हादसे पर सवाल
सीआईएसएफ के अनुसार, 7 सितंबर को संबंधित क्षेत्र में एरिया डोमिनेशन किया गया, जिसमें 90 बल सदस्यों ने भाग लिया। वहीं 4 सितंबर को कांटापहाड़ी क्षेत्र में छापेमारी के दौरान करीब 11.49 टन अवैध कोयला बरामद किया गया।
इसके अलावा 3 सितंबर को 50 सीआईएसएफ जवानों के साथ नाइट पेट्रोलिंग की गई थी। इससे पहले 2 सितंबर को कांटापहाड़ी क्षेत्र में छापेमारी के दौरान करीब 2,000 बोरी अवैध कोयला बरामद होने और उसे मौके पर नष्ट किए जाने की बात प्रेस विज्ञप्ति में कही गई है।
सीआईएसएफ ने यह भी बताया कि सूचना आधारित छापेमारी, नियमित क्यूआरटी पेट्रोलिंग, एरिया डोमिनेशन और सतत निगरानी के माध्यम से अवैध खनन रोकने के प्रयास जारी थे।
हादसे से एक दिन पहले भी चला था अभियान
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, 12 सितंबर से बीसीसीएल प्रबंधन द्वारा अवैध खनन के मुहानों की भराई के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया था। इसके तहत ओवरबर्डन (OB) डालने का काम शुरू किया गया और प्रेस विज्ञप्ति जारी होने तक करीब 46 हॉलपैक लोड OB डाला जा चुका था।
इसके बावजूद अगले ही दिन उसी क्षेत्र में भू-धंसान की घटना सामने आना कई सवाल खड़े करता है। क्या अवैध खनन का कोई हिस्सा कार्रवाई से बचा हुआ था? क्या खनन स्थल की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित थी? और क्या वहां मौजूद लोगों को समय रहते हटाया जा सका था—इन सवालों का जवाब जांच में सामने आना जरूरी है।
9 सितंबर को पुलिस को दी गई थी सूचना
सीआईएसएफ की प्रेस विज्ञप्ति में एक महत्वपूर्ण बात यह भी सामने आई है कि 9 सितंबर को सीआईएसएफ के वरिष्ठ कमांडेंट द्वारा रामकनाली थाना प्रभारी को संबंधित क्षेत्र में हो रही अवैध खनन गतिविधियों/प्रयासों के संबंध में पत्र भेजा गया था।

