भोपाल:- विधानसभा सत्र में जोबट विधायक सेना महेश पटेल द्वारा लगाए गए प्रश्न के लिखित उत्तर में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने स्वीकार किया है कि प्रदेश के पेसा मोबिलाइजरों की सेवाएं भारत सरकार की आरजीएसए योजना के तहत ली गई थीं और योजना की अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त होने के कारण उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।

सरकार ने अपने उत्तर में यह भी कहा कि पेसा मोबिलाइजरों का कार्य अस्थायी एवं अंशकालिक प्रकृति का था, इसलिए उनके पुनर्नियोजन अथवा वैकल्पिक व्यवस्था का प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता। साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया कि पेसा एक्ट का क्रियान्वयन पंचायतों के अन्य उपलब्ध अमले के माध्यम से कराया जाएगा।इस जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए जोबट विधायक सेना महेश पटेल ने कहा कि नियुक्ति के समय जारी आदेश में कहीं भी यह उल्लेख नहीं था कि वर्ष 2026 में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी। चार वर्षों तक आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने, पेसा कानून के क्रियान्वयन, ग्राम विकास योजनाओं के निर्माण और पंचायतों को सहयोग देने का कार्य लेने के बाद हजारों युवाओं को एक झटके में बेरोजगार कर देना अन्यायपूर्ण है।उन्होंने कहा कि भारत सरकार के पंचायत राज मंत्रालय के 6 अप्रैल 2026 के पत्र में मानव संसाधनों की निरंतरता बनाए रखने की बात कही गई थी, इसके बावजूद प्रदेश के लगभग 5212 पेसा मोबिलाइजरों को बाहर कर दिया गया। सरकार यह भी स्पष्ट नहीं कर पाई कि इन युवाओं के पुनर्नियोजन, समायोजन अथवा वैकल्पिक रोजगार के लिए कोई योजना है या नहीं।सेना महेश पटेल ने कहा कि यह केवल 5212 युवाओं के रोजगार का नहीं, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में पेसा कानून और ग्राम सभाओं को मजबूत करने का भी प्रश्न है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पेसा मोबिलाइजरों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पुनर्विचार कर ठोस निर्णय लिया जाए

