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पारदर्शी प्रशासन के दावों पर सवाल, रिश्वतखोरी बनी चिंता का विषय

पारदर्शी प्रशासन के दावों पर सवाल, रिश्वतखोरी बनी चिंता का विषय
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पंडरिया। राज्य में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी को लेकर लगातार सामने आ रहे मामलों ने सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार पिछले 29 महीनों में भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों द्वारा 161 रिश्वतखोर अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। सबसे अधिक मामले राजस्व, शिक्षा और पुलिस विभाग से जुड़े पाए गए हैं, जहां आम नागरिकों को अपने वैधानिक कार्य करवाने के लिए भी रिश्वत की मांग का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार जमीन नामांतरण, सीमांकन, रिकॉर्ड सुधार, मुआवजा भुगतान, निर्माण कार्यों का भुगतान, पेंशन तथा बिजली कनेक्शन जैसे कार्यों में सबसे अधिक रिश्वत मांगी गई। इन मामलों में 45 लाख रुपये से अधिक की रिश्वत राशि भी जब्त की गई है। कार्रवाई के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी भी कानून के शिकंजे में आए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि रिश्वतखोरी केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि शासन व्यवस्था में जनता के विश्वास को कमजोर करने वाली गंभीर समस्या है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आम नागरिकों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और कई बार बिना रिश्वत दिए काम नहीं होने की शिकायतें सामने आती हैं।
पंडरिया सहित पूरे प्रदेश में यह विषय चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई के साथ-साथ विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने, ऑनलाइन सेवाओं को बढ़ावा देने तथा दोषियों को त्वरित दंड देने की आवश्यकता है, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और सरकारी तंत्र में विश्वास बहाल हो सके।