

दौसा। भाजपा जिला अध्यक्ष लक्ष्मी रेला ने विश्व एआई सम्मिट के भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन के प्रति कांग्रेस के नकारात्मक रवैये की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि कांग्रेस का आचरण राष्ट्रहित के विरुद्ध, दुर्भाग्यपूर्ण और शत्रुता से प्रेरित है।
उन्होंने कहा, “जब पूरा विश्व भारत के नेतृत्व, नवाचार क्षमता और वैश्विक भूमिका की सराहना कर रहा है, तब कांग्रेस ऐसे आयोजनों को बदनाम करने का प्रयास कर अपनी संकीर्ण और अवरोधक राजनीति को उजागर कर रही है।कांग्रेस दूसरे देश से किये समझौते में भारत का अहित कर रही है
लक्ष्मी रेला ने राहुल गांधी की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा कि “कांग्रेस नेतृत्व का आचरण निरंतर संदिग्ध और शत्रुतापूर्ण होता जा रहा है। ” उन्होंने तीखा आरोप लगाया कि ” क्या कांग्रेस विदेशी समझौतों की भरपाई के तहत भारत के साथ शत्रुतापूर्ण व्यवहार कर रही है ? जनता ने कांग्रेस को उसके राष्ट्रविरोधी रवैये के कारण सत्ता से बाहर किया, फिर भी पार्टी अपनी नकारात्मक राजनीति से बाज नहीं आ रही। उनका एकमात्र एजेंडा देश की छवि धूमिल करना बन गया है।”
उन्होंने कहा कि ” राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने राजनीतिक मर्यादाओं का लगातार हनन किया है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर असंगत और अपमानजनक आचरण को बढ़ावा देना लोकतंत्र नहीं, बल्कि अराजकता को प्रोत्साहित करना है। भारत के लिए सम्मानप्रद वैश्विक शिखर सम्मेलन को बदनाम करने का प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ आराजक विश्वासघात है।कांग्रेस भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा पर निरंतर आघात का प्रयास करती रही है।
भाजपा जिला मीडिया प्रभारी प्रेम हरितवाल ने कहा एक ओर विश्व के राष्ट्राध्यक्ष, तकनीकी विशेषज्ञ और उद्योग जगत के अग्रणी प्रतिनिधि भारत की पहल की सराहना कर रहे थे, वहीं कांग्रेस देश की छवि को नुकसान पहुँचाने में लगी रही। भारत आज जी-20 जैसे वैश्विक आयोजनों की सफल मेजबानी और एआई जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों में नेतृत्व के कारण विश्व मंच पर सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है। देश की यह प्रगति कांग्रेस को पच नहीं रही है।
” कांग्रेस का रिकॉर्ड देश की उपलब्धियों पर प्रश्नचिह्न लगाने का रहा है,चाहे सेना की कार्रवाई पर संदेह हो या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर निराधार आलोचना।आज का सशक्त और आत्मविश्वासी भारत कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति व राष्टविरोधी बयानबाजी को स्वीकार कर चुका है।
प्रेम हरितवाल ने कहा कि “100 से अधिक देशों की भागीदारी, वैश्विक नेतृत्व की उपस्थिति और व्यापक जनसहभागिता ने इस आयोजन को ऐतिहासिक सफलता बनाया। ऐसे अवसरों पर विपक्ष को रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए थी, किंतु कांग्रेस ने व्यवधान और विवाद को चुना।”
अंत में उन्होंने कहा कि “राष्ट्र का मान-सम्मान सर्वोपरि है। राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, परंतु भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को आघात पहुँचाना अक्षम्य अपराध है। कांग्रेस अपने इन्ही कारगुजारियों के कारण नकारात्मक राजनीति का प्रतीक बन जन अस्वीकृति को प्राप्त हो चुकी है।