
सामूहिक सुंदरकाण्ड पाठ में शामिल हुए पाँच हजार से अधिक श्रद्धालु

भक्ति, सेवा और समर्पण से समाज में सकारात्मक परिवर्तन की रखी जा सकती है मजबूत नींव
संवाददाता। रणजीत कुमार। जहानाबाद। शहर के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित सुमंगलम महाआयोजन अत्यंत भक्तिमय और आध्यात्मिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर पाँच हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने एक साथ सामूहिक सुंदरकाण्ड पाठ में भाग लिया। सुबह से ही शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ गांधी मैदान की ओर उमड़ पड़ी और पूरा परिसर राममय हो गया। लगातार पिछले दस वर्षों से आयोजित हो रहा सुमंगलम अब जहानाबाद की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। वहीं गांधी मैदान के उत्तरी छोर स्थित रामायण मंदिर में अनवरत चल रहे अखंड रामचरितमानस पाठ, राम नाम संकीर्तन और अखंड ज्योति को इस वर्ष सात वर्ष पूर्ण हो गए। यह अखंड अनुष्ठान आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है। कार्यक्रम के दौरान हजारों कंठों से एक साथ गूंजे सुंदरकाण्ड के श्लोक और “जय सियाराम” के जयघोष से गांधी मैदान एक विशाल साधना स्थल में तब्दील हो गया। श्रद्धालुओं के चेहरों पर शांति, उल्लास और आध्यात्मिक तृप्ति साफ झलक रही थी।
इस अवसर पर हुलासगंज स्थान के मठाधीश स्वामी हरेरामाचार्य जी महाराज ने श्रद्धालुओं को आशीर्वचन देते हुए कहा कि जहानाबाद में हो रहा यह अखंड अनुष्ठान दुर्लभ है और यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामूहिक साधना व सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ती है।
स्वामी जी ने सुमंगलम परिवार और आयोजक श्री राकेश जी को इस भव्य आयोजन के लिए आशीर्वाद देते हुए निरंतरता और निःस्वार्थ सेवा की सराहना की। वहीं आयोजक श्री राकेश जी ने कहा कि सुमंगलम का उद्देश्य समाज में शांति, सद्भाव और सकारात्मकता का विस्तार करना है। उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में इस आयोजन को और भी व्यापक स्तर पर आयोजित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, व्यवस्था और सेवा भाव विशेष रूप से सराहनीय रहा। स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं की सुविधा, स्वच्छता और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा। कार्यक्रम में शामिल श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताते हुए कहा कि सामूहिक सुंदरकाण्ड पाठ से उन्हें मानसिक शांति और आत्मिक ऊर्जा की अनुभूति हुई। सुमंगलम महाआयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भक्ति, सेवा और समर्पण से समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव रखी जा सकती है।