
रिपोर्टर : दिलीप कुमरावत
मनावर। (जिला धार) अंचल में कहीं जर्जर भवन तो कहीं शिक्षकों की कमी के बीच आज सोमवार से नया शिक्षण सत्र का आगाज हो गया। टूटी छतों के नीचे नौनिहाल भविष्य संवारने का स्वप्न लिए स्कूल पहुंचें। सुधार के वादों और दावों के बीच एक बार फिर शासकीय स्कूलों में प्रवेशोत्सव मनाया गया और जिम्मेदार सिर्फ आश्वासन देते और लोकलुभावन घोषणा करते नजर आये। कई जगह जनप्रतिनिधियों द्वारा शासन की योजनाओं का जमकर गुणगान किया गया। मगर धरातल पर कई जगह स्कूलों की हालत दयनीय है, तो कही स्कूल प्रबंधन डामा डोल है। हालांकि स्तर के पहले दिन बच्चों के स्वागत के लिए शिक्षकों ने जोरदार तैयारी की।
जनजाति कार्य विभाग और शिक्षा विभाग के माध्यम से अंचल में हायर सेकंडरी, हाई स्कूल, प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर स्कूलों का संचालन किया जाता है।
बताया जाता है कि अतिथि शिक्षकों की भी तैनाती अभी तक स्कूलों में नहीं हो पाई है। कई स्कूलों में शिक्षकों तथा अन्य स्टाफ की प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर कमी है। तो कही स्कूल का भवन जर्जर अवस्था में है। उच्च स्तर पर भी शिक्षकों की कमी है। स्कूल के भवनों को लेकर भी हालत चिंताजनक है। आदिवासी अंचल के ऐसे सुदूर ग्रामीण क्षेत्र हैं, जहां पर स्कूल भवन दयनीय स्थिति में है। कुछ जगह तो निजी भवनों में स्कूल चल रहे हैं। कहीं छत गलने, दीवारों में दरार, तो कहीं प्लास्टर गिरने आदि मरम्मत के काम किया जाना प्रस्तावित है।
स्कूलों में जगह जगह प्रवेश उत्सव मनाया गया। बच्चों का स्वागत किया गया पुस्तके वितरित की गई।
जब तक गर्मी का तेज असर रहेगा तब तक सुबह की पालियों में ही स्कूल संचालित होगे ऐसा बताया जा रहा है।
कई जगह स्कूलों की मरम्मत के कार्य स्कूल प्रबंधन द्वारा करवाए जा रहे हैं। तथा प्रयास किए जा रहे हैं कि वर्षा काल में समस्याएं न आएं। शिक्षकों की कमी भी गंभीर समस्या है जिसके लिए भी माकूल व्यवस्था की जा रही है ताकि शिक्षकों की कमी से बच्चों की पढ़ाई पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े। नागरिकों ने स्कूलों के रिक्त पदों की पूर्ति और स्कूल भवन, खेल मैदान, फर्नीचर, टाटपट्टी, खेल सामग्री, पाठ्य पुस्तके जैसी ज्वलंत समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग शासन प्रशासन से की।