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फर्जी कॉल कर बगैर मरीज दौड़ा रहे एंबुलेंस*

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*फर्जी कॉल कर बगैर मरीज दौड़ा रहे एंबुलेंस*

अंबेडकरनगर
फर्जी कॉल करवाकर बगैर मरीज के ही सड़क पर एंबुलेंस दौड़ाने के बड़े खेल का खुलासा हुआ है। निजी कंपनी को बड़ा आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए जिलास्तर से लेकर मुख्यालय पर बैठे कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता सीएमओ डॉ. राजकुमार द्वारा कराई गई जांच में मिली है। मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे शीघ्र ही स्वास्थ्य निदेशालय को भेजे जाने की तैयारी है।लगभग एक पखवाड़ा पूर्व सीएमओ कार्यालय को शिकायत मिली कि सीएचसी बसखारी से जुड़े 102 व 108 एंबुलेंस सेवा के चालक आशा बहुओं से फर्जी कॉल करवाकर बगैर मरीज के ही एंबुलेंस सड़क पर दौड़ा रहे हैं। ताकि मरम्मत खर्च के अलावा कई अन्य प्रकार का लाभ कंपनी को मिल सके। शिकायत को गंभीरता से लेकर सीएमओ के निर्देश पर कई टीम ने जिले के अलग-अलग क्षेत्र में जांच शुरू की।बृहस्पतिवार को जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. मारकंडेय व डिप्टी डीआईओ नोडल प्रभारी एंबुलेंस डॉ. गौतम मिश्र की टीम ने अकबरपुर में सघन जांच अभियान चलाया। जांच में जो खुलासे हुए वह अत्यंत चौंकाने वाले रहे। अपर सीएमओ डॉ. रामानंद सिद्धार्थ ने बताया कि जांच के दौरान चालक व एंबुलेंस के अन्य कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें ऊपर से निर्देश है कि प्रतिदिन ज्यादा से ज्यादा चक्कर लगाए जाएं।इसके लिए बाकायदा आशा बहुओं से फर्जी कॉल कराई जाती है। लखनऊ स्थित गुनपति बैंकेट कृष्णा रेडडी (जीवीके) के कार्यालय से कॉल के आधार पर हम सभी को संबंधित क्षेत्र में भेजा जाता है। हम सभी को पता रहता है कि जहां भेजा जा रहा है वहां कोई मरीज नहीं है लेकिन इसके बाद भी एंबुलेंस लेकर संबंधित स्थान पर जाते हैं।इस बड़े खुलासे के बाद एंबुलेंस प्रभारी अजहरुदीन को सीएमओ कार्यालय बुलाया गया। वाहनों के चक्कर लगाने से संबंधित पत्रावलियों को मंगाया गया। सीएमओ कार्यालय के अनुसार जांच में बड़ा खेल सामने आया है। मालूम हो कि जिले में 52 एंबुलेंस हैं। 102 व 108 सेवा की 26-26 एंबुलेंस हैं।बृहस्पतिवार को अकबरपुर क्षेत्र में चली जांच के दौरान एक एंबुलेंस चालक ने बताया कि उसे ऊपर से निर्देश है कि प्रतिदिन हर हाल में 30 चक्कर लगाना ही है। ऐसे में इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए संबंधित क्षेत्र की आशा बहुओं का सहारा लेना पड़ता है। आशा द्वारा फर्जी कॉल कराई जाती है। इसके बाद संबंधित क्षेत्र में वाहन लेकर जाते हैं। ऐसा होने पर ही वाहन मरम्मत खर्च के साथ अन्य कई प्रकार की सुविधाएं मिलती हैं। अक्सर ऐसा होता है कि कोई मरीज नहीं मिलता तो लक्ष्य को पूरा करने में काफी समस्या होती है।जिले के अलग-अलग क्षेत्र में एंबुलेंस की जांच की गई। कई प्रकार की खामियां मिली हैं। जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है। शीघ्र ही रिपोर्ट स्वास्थ्य निदेशालय को भेजी जाएगी। – डॉ. राजकुमार, सीएमओ

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