
रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597
मनावर (धार)। नगर से लगभग 15 किलोमीटर दूर ग्राम देवरा स्थित परमारकालीन प्राचीन शिव मंदिर आज भी संरक्षण के अभाव में उपेक्षा का शिकार है। 28 अगस्त 2024 को पुरातत्व विभाग द्वारा मंदिर का सर्वेक्षण किए जाने के बाद क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी कि इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे, लेकिन अब तक कोई उल्लेखनीय प्रगति दिखाई नहीं दी है।
*सुरक्षा और संरक्षण* क्षेत्रवासियों का कहना है कि सर्वेक्षण के बाद भी मंदिर परिसर में न तो सुरक्षा के लिए चौकीदार नियुक्त किया गया और न ही स्थायी सूचना बोर्ड लगाया गया। विभाग द्वारा लगाया गया अस्थायी फ्लेक्स बोर्ड भी समय के साथ क्षतिग्रस्त हो चुका है। ऐसे में मंदिर की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर लोगों में निराशा है।
*परमारकालीन धरोहर की अनदेखी* स्थानीय मान्यताओं के अनुसार देवरा का यह शिव मंदिर परमारकालीन है और अपने समय में अत्यंत भव्य रहा होगा। क्षेत्र में यह भी कहा जाता है कि मंदिर का विशाल शिखर दूर मांडव क्षेत्र से दिखाई देता था। हालांकि इन ऐतिहासिक मान्यताओं की आधिकारिक पुष्टि पुरातत्व विभाग द्वारा किया जाना शेष है।
*ऐतिहासिक महत्व* कुछ वर्ष पूर्व पुरातत्व विभाग ने मंदिर के मलबे की सफाई के दौरान प्राचीन शिवलिंग एवं अन्य पुरातात्विक अवशेषों को बाहर निकाला था। परिसर में आज भी विशाल शिवलिंग, जलाधारी तथा कई प्राचीन शिलाखंड और मूर्तियां मौजूद हैं, जो इस धरोहर के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं।
*श्रद्धा का प्रमुख केंद्र* बालीपुर धाम के ब्रह्मलीन संत श्री गजाननजी महाराज ने भी इस प्राचीन शिवलिंग का दर्शन कर श्रद्धालुओं को यहां पूजा-अर्चना के लिए प्रेरित किया था। इसके बाद से विशेष रूप से श्रावण मास में बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
*क्षेत्रवासियों की प्रमुख मांगें* मंदिर परिसर में स्थायी सूचना बोर्ड लगाया जाए।
सुरक्षा के लिए चौकीदार की नियुक्ति की जाए।
प्राचीन मूर्तियों एवं अवशेषों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
विशेषज्ञों की देखरेख में वैज्ञानिक अध्ययन एवं जीर्णोद्धार की कार्ययोजना बनाई जाए।
देवरा के प्राचीन शिव मंदिर को धार्मिक एवं ऐतिहासिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए।
*सबसे बड़ा सवाल* जब 28 अगस्त 2024 को पुरातत्व विभाग सर्वेक्षण कर चुका है, तो इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और जीर्णोद्धार की दिशा में ठोस कार्रवाई आखिर कब शुरू होगी? क्षेत्रवासियों की निगाहें अब शासन और पुरातत्व विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं।
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