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गुरु पूर्णिमा पर उमड़ेगी आस्था.. देवादिदेव महादेव बंकनाथ अटल दरबार की निकलेगी भव्य पालकी

बालीपुर धाम सहित नगर और ग्रामीण क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों में होंगे गुरु पूजन, सत्संग, भजन-कीर्तन एवं महाप्रसादी के आयोजन

रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597

मनावर। जिला धार।।आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को मनावर नगर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गुरु पूर्णिमा पर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। नगर के विभिन्न मंदिरों एवं गुरुधामों में प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं का आगमन प्रारंभ होगा। भक्त अपने गुरुओं का पूजन-अर्चन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे तथा धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लेंगे।

बालीपुर स्थित ब्रह्मलीन संत श्री गजानंदजी महाराज के पावन धाम पर गुरु पूर्णिमा का विशेष आयोजन रखा गया है। यहां पूज्य योगेश जी महाराज एवं पूज्य सुधाकर जी महाराज के सानिध्य में गुरु पूजन, सत्संग, भजन-कीर्तन, प्रवचन एवं महाप्रसादी का आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

इसी प्रकार नगर के गायत्री मंदिर, दत्तात्रेय दत्त मंदिर (गोपालपुरा), ब्रम्हलीन बद्रीदास बाबा खेड़ापति हनुमान मंदिर (जूनी मनावर), ब्रम्हलीन रवि भारती बाबा मंगला देवी मंदिर, ब्रम्हलीन गंगापुरी बाबा गुप्तेश्वर महादेव मंदिर (कस्थली), भरतदास बाबा शनि मंदिर (धार रोड) तथा रामसेवकदास बाबा सीताराम आश्रम जागेश्वर मंदिर (राधारमण कॉलोनी), आशाराम बापू आश्रम (सेमल्दा रोड़), थानापती निलेशगिरी महाराज नारायण आश्रम (शनि मंदीर तारापुर), संत सिंगाजी आश्रम वायल सहित अनेक धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना, गुरु वंदन, भजन-कीर्तन, महाप्रसादी एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंदिरों को आकर्षक रूप से सजाया गया है तथा आयोजन समितियों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। इस अवसर पर स्थानीय बंकनाथ अटल दरबार मंदिर से श्रावण सोमवार की पहली पालकी नगर के मुख्य मार्गों से धूमधाम से निकाली जाएगी।

*गुरु पूर्णिमा का महत्व*
भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है। शास्त्रों में कहा गया है—
“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥”

मान्यता है कि गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं। गुरु पूर्णिमा महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी मनाई जाती है। महर्षि वेदव्यास ने वेदों का विभाजन, महाभारत की रचना तथा अनेक पुराणों का संकलन कर मानव समाज को अमूल्य आध्यात्मिक धरोहर प्रदान की। इसलिए इस दिन को ‘व्यास पूर्णिमा’ भी कहा जाता है।

*गुरु पूर्णिमा का विधान*
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु पूर्णिमा के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। इसके बाद गुरु, इष्टदेव एवं महर्षि वेदव्यास का पूजन किया जाता है। श्रद्धालु पुष्प, फल, वस्त्र एवं दक्षिणा अर्पित कर गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। अनेक स्थानों पर सत्संग, धार्मिक प्रवचन, भजन-कीर्तन, यज्ञ एवं अन्नदान जैसे पुण्य कार्य भी आयोजित किए जाते हैं। इस दिन सेवा, संयम, दान और सदाचार का विशेष महत्व माना गया है।

धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों ने श्रद्धालुओं से गुरु पूर्णिमा पर्व श्रद्धा, अनुशासन एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने तथा गुरुओं के बताए सत्य, सेवा, संस्कार और मानवता के मार्ग पर चलने का आह्वान किया है।

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