
छपरा, बिहार | विशेष संवाददाता
बिहार की धरती से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करने वाले एचआरएच प्रिंस डॉ. देशराज विक्रांत को पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्थान, शिक्षा जागरूकता एवं मानव कल्याण के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए विश्वस्तरीय संस्था World Federation of Arts, Literature, Education, Peace and Culture (FEMALEPC) द्वारा प्रतिष्ठित “Doctor Honoris Causa in Environmental Science” की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया है।
यह सम्मान केवल एक अकादमिक उपाधि नहीं, बल्कि समाज, प्रकृति और मानवता के प्रति उनके समर्पण, दूरदर्शी नेतृत्व तथा सतत विकास के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों की अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति और सम्मान का प्रतीक है।
प्रमाण पत्र में संस्था ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि डॉ. देशराज विक्रांत ने पर्यावरणीय अनुसंधान, प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन, जन-जागरूकता अभियानों, सतत विकास तथा मानव कल्याण से जुड़े क्षेत्रों में प्रभावशाली योगदान देकर समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनके प्रयासों ने न केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक किया है, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों को भी सशक्त बनाया है।
वैश्विक मंच पर भारतीय प्रतिभा का सम्मान
विश्व के विभिन्न देशों में शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सामाजिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने वाली संस्था FEMALEPC द्वारा प्रदान किया गया यह सम्मान उन चुनिंदा व्यक्तित्वों को दिया जाता है जिन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो। ऐसे प्रतिष्ठित मंच से प्राप्त यह सम्मान भारतीय प्रतिभा और सेवा भावना की वैश्विक स्वीकार्यता को भी दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि न केवल डॉ. देशराज विक्रांत के लिए गौरव का विषय है, बल्कि बिहार और पूरे भारत के लिए भी सम्मान की बात है। यह सम्मान उन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में अपना योगदान देना चाहते हैं।
पर्यावरण एवं समाज के प्रति निरंतर समर्पण
डॉ. देशराज विक्रांत लंबे समय से पर्यावरणीय जागरूकता, वृक्षारोपण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, शिक्षा प्रोत्साहन और सामाजिक विकास से जुड़े विभिन्न अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। उनके नेतृत्व में किए गए अनेक जनहितकारी प्रयासों ने समाज के विभिन्न वर्गों को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।
उनकी कार्यशैली का मूल उद्देश्य केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रकृति और मानवता के बीच संतुलन स्थापित कर एक बेहतर एवं टिकाऊ भविष्य का निर्माण करना रहा है। यही कारण है कि उनके कार्यों को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा जा रहा है।
सम्मान पर व्यक्त की कृतज्ञता
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एचआरएच प्रिंस डॉ. देशराज विक्रांत ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए अत्यंत गौरव एवं जिम्मेदारी का विषय है। उन्होंने इसे समाज, पर्यावरण और मानवता की सेवा के लिए समर्पित सभी सहयोगियों, शुभचिंतकों एवं प्रेरणास्रोत व्यक्तित्वों को समर्पित करते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें भविष्य में और अधिक निष्ठा एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षण, शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और मानवीय मूल्यों की स्थापना के लिए उनका प्रयास निरंतर जारी रहेगा तथा वे समाज और राष्ट्र के हित में अपनी सेवाएं आगे भी समर्पित भाव से देते रहेंगे।
युवाओं के लिए प्रेरणादायी उपलब्धि
आज के दौर में जब पर्यावरणीय चुनौतियां वैश्विक चिंता का विषय बनी हुई हैं, ऐसे समय में डॉ. देशराज विक्रांत को मिला यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान इस बात का प्रमाण है कि समर्पित प्रयास, सकारात्मक सोच और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना व्यक्ति को वैश्विक पहचान दिला सकती है।
यह उपलब्धि न केवल एक व्यक्ति की सफलता की कहानी है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि यदि उद्देश्य जनकल्याण और मानवता की सेवा हो, तो स्थानीय स्तर पर किया गया कार्य भी अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी पहचान बना सकता है।
“यह सम्मान सेवा, समर्पण और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रकाश स्तंभ बनेगा।”


