
धार:–सरदारपुर बदनावर मार्ग पर स्थित लाबरिया के समीप महल जैसी भव्य गौशाला का निर्माण हो रहा। संत श्री कमल किशोर जी नागर लगातार कार्य का जायजा ले रहे हे। और गोशाला निर्माण को लेकर भक्तों में हर्ष व्याप्त है तथा क्षेत्र में अलौकिक और मनमोहक गोशाला का निर्माण अनूठी छाप के समान है.
पिछले तीन दशको मे मालवा-निमाड़ अंचल मे समाज सुधार के क्षैत्र मे जो कार्य हुए उसमे मालव माटी के माॅ सरस्वती के वरद पुत्र गौसेवक प्रख्यात भागवत प्रवचनकर्ता संत श्री कमल किशोर जी नागर का अहम योगदान रहा। मालवा की मीठी वाणी से आपने समाज सुधार के लिए जो अलख इस क्षैत्र मे जगाईं वह प्रंशनीय है। वर्तमान और भविष्य को लेकर आपकी सोच हमेशा औरों के लिये प्रेरणा स्त्रोत रही है। आपके प्रयास से लाबरिया के समीप महल जैसी भव्य गौशाला का निर्माण हो रहा है।
आधुनिक निर्माण—पिछले दो वर्ष की बात करे तो संत श्री का स्नेह सरदारपुर क्षेत्र के देदला, राजोद एंव लाबरिया सहित क्षैत्र को प्राप्त हो रहा है। राजोद एंव देदला की गौशाला भी बडे गौतीर्थ के तौर पर विकसीत हुई हैं, वही लाबरिया गौशाला को लेकर संत श्री नागर जी सोच आधुनिक एवं आगामी 50 वर्ष आगे की है।
लाबरिया गौशाला पर चल रहे निर्माण कार्यो का जायजा लेन आए संत श्री नागर जी ने कहा की वर्तमान यदि सुधर गया तो भविष्य की चिंता नही होगी, आज का युवा आधुनिकता की एवं पश्चिमी सभ्यता के चलते भटक चुका है। टीन शेड की गौशाला देखकर उसके मन मे गौमाता की सेवा का भाव पुर्ण रूपेण नही दिखाई देता लेकिन हमारा मानना है की यदि गौशाला भव्य एवं महल जैसी होगी तो युवा वर्ग का ध्यान इस ओर खीचा चला आयेगा और धर्म से जुडकर अपने जीवन में सुधार लाएगे।
संत श्री नागर जी ने कहा की परिवार का युवा वर्ग घुमने फिरने पहाड़ी क्षैत्र या पुराने महल देखने जाता है। महल जैसी गौशाला निमार्ण करने का मन मे विचार आया और यहा के लोगों की श्रद्धा एवं सेवाभाव को देखते हुए यहा पर किले जैसी भव्य गौशाला तैयारी हो रही है।
सामाजिक और धार्मिक आयोजनों से गोशाला होंगी आत्मनिर्भर — संत श्री ने बताया की उदयपुर, जयपुर, चित्तौडगढ जैसी जगहो पर युवा वर्ग पुराने महल देखने जाते है लेकिन लाबरिया की गौशाला इन्ही महलो जैसी होगी, बाहर गार्डन होगा, हाथी, ऊॅट के स्टेच्यु होगे वही फव्वारे के साथ हाईमास्क लैंप लगेगे। संत श्री ने कहा की आज लोग बडे गार्डन मे जाकर शादी ब्याह जैसे आयोजन करते है जिससे लाखो रू खर्च करते हैै। लेकिन इस महल जैसी गौशाला मे ये लोग धार्मिक, सामाजिक आयोजन करेंगे तो इससे उनका जुड़ाव गौ माता की और बढ़ेगा। कम खर्च मे ही उन्हे महल जैसे पर्यटन स्थल जैसा आयोजन स्थल मिल जायेगा। वही गौशाला भी आत्मनिर्भर बनेगी।
उक्त निर्माण पश्चात संत श्री नागर जी के मुखारविंद से जल्द भागवत कथा हो सकती हैं ।