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कार्तिक मास शुरू होते ही कृष्ण भक्ति में रंगा ब्रज, सभी तरफ गूंज रही राधे-राधे की जयकार

 

 

कार्तिक मास शुरू होते ही कृष्ण भक्ति में रंगा ब्रज, सभी तरफ गूंज रही राधे-राधे की जयकार

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रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां डीग 9783029649

कामां – कार्तिक मास शुरू होते ही धार्मिक कार्यो की मची धूम से समूचा ब्रजमंडल कृष्णमय हो उठा है। कार्तिक मास में दीपदान के साथ साथ पवित्र कुण्डों ,सरोवरों मे स्नान,श्रीमदभागवत का श्रवण,तारों की छांव में स्नान और दान इत्यादि का बड़ा महत्व है लेकिन कान्हा की नगरी में सबसे अधिक महत्व ब्रजमंडल की परिक्रमा का होता है। ब्रज मण्डल परिक्रमा में जहां चौरासी कोस की परिक्रमा की जाती है ।
अब तक ब्रजयात्रा में लगभग पचास हजार से अधिक भक्त शामिल हो चुके हैं ।
मंदिर विमल बिहारी क़े सेवाअधिकारी संजय लवानिया ने बताया कि कार्तिक मास में ब्रज का वास इसलिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है कि कार्तिक मास को श्रीकृष्ण का माह कहा जाता है।श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है कि सभी मासों में कार्तिक मास उन्हें बहुत अधिक प्रिय है।
इसी महत्व के कारण विदेशी कृष्ण भक्त तो इस माह में ब्रजमंडल यानी चौरासी कोस की परिक्रमा करते हैं।।उन्होंने बताया कि बहुत से भक्त तो ब्रज के किसी तीर्थ में कल्पवास तक कर रहे है। कुल मिलाकर कार्तिक मास की शुरूआत से ही ब्रज के कण कण में कृष्ण भक्ति की गंगा प्रवाहित हो रही है।

पद्म पुराण में उल्लेख है कि पूर्व जन्म में आजीवन एकादशी और कार्तिक व्रत का अनुष्ठान करने से ही सत्यभामा को कृष्ण की अर्द्धांगिनी होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। व्रत और तप की दृष्टि से कार्तिक मास को परम कल्याणकारी, श्रेष्ठ और दुर्लभ कहा गया है-

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