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ग्राम मलगांव में करोड़ों का मुआवजा घोटाला बाबू और पटवारी मिलकर लगाए करोड़ों का चूना

एस ई सी एल और प्रशासन की भूमिका संदिग्ध

  1. कोरबा में मुआवजा घोटाले का बड़ा धमाका! गोभिल-जायसवाल गैंग का पर्दाफाश, CBI की जांच शुरू – SECL की चुप्पी पर उठे सवाल
  2. कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में चल रहे दीपका परियोजना मुआवजा घोटाले का बड़ा खुलासा सामने आया है। अब तक दबे-छुपे तरीके से सरकारी धन की लूट का यह खेल आखिरकार जनता और प्रशासन के सामने बेनकाब हो गया है। करोड़ों रुपए की शासकीय भूमि को निजी दिखाकर मुआवजा लेने की साजिश का मास्टरमाइंड राजस्व विभाग का ही बाबू मनोज गोभिल निकला, जिसने अपने पूरे कुनबे के नाम फर्जी मुआवजा तैयार करवा डाला।

फर्जी मुआवजा – फर्जी दावेदार – असली घोटालेबाज सरकारी बाबू!

 

खसरा नंबर 558/1 की 16.147 हेक्टेयर शासकीय भूमि को निजी बताते हुए नीलू, नीलम, बरातु, विमला देवी जैसे नामों पर फर्जी मुआवजा बनाया गया। ये सब नाम मनोज गोभिल के रिश्तेदार हैं। फरवरी 2024 में बाकायदा कागजों पर सील-सिग्नेचर के साथ मुआवजा पास करने की कोशिश हो रही थी, लेकिन समय रहते सच उजागर हो गया।

प्रशासन ने तत्काल पांचों मुआवजों को रद्द कर दिया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है—क्या सिर्फ मुआवजा रद्द करना काफी है? घोटालेबाज बाबू मनोज गोभिल और पटवारी विकास जायसवाल पर अब तक FIR क्यों नहीं हुई?

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श्यामू जायसवाल गिरोह भी जांच के घेरे में – CBI ने दबिश दी

कोरबा के चर्चित ट्रांसपोर्टर और कथित श्रमिक नेता श्यामू जायसवाल और उनके पूरे परिवार के नाम भी इस मुआवजा घोटाले में सामने आए हैं। फर्जी संपत्तियों के आधार पर लाखों-करोड़ों की रकम पाने की तैयारी थी। CBI ने जांच शुरू कर दी है और सभी भुगतान फिलहाल रोक दिए गए हैं।

 

श्यामू के साथ-साथ उनके रिश्तेदार—खुशाल, अनुभव, अर्पिता, सिद्धार्थ, प्रदीप, रेखा, केदारनाथ, रेणुका, आलोक, हीरामणि, प्रीति—सब इस माफिया जाल में शामिल हैं।

SECL की भूमिका संदेहास्पद – मूक सहमति या मिलीभगत?

जब जिला प्रशासन जांच कर कार्रवाई कर रहा है, SECL अब भी खामोश क्यों है? क्या यह मुआवजा घोटाला उसकी नाक के नीचे नहीं हुआ? क्या अधिकारियों की मिलीभगत से मुआवजा पत्रक तैयार हुए? अगर शिकायतकर्ता सामने नहीं आते, तो आज यह पैसा सीधे फर्जी दावेदारों की जेब में पहुंच जाता।

जनता का सवाल – क्या यह ‘मुआवजा घोटाला’ है या सरकारी ‘मिलावट घोटाला’?

अब वक्त आ गया है कि सिर्फ जांच नहीं, सजा भी हो।

दोषी अफसरों पर केस दर्ज हो

SECL जवाब दे कि उसकी चुप्पी का मतलब क्या है

CBI जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए

और सबसे जरूरी – असली किसानों को उनका हक मिले

“यह सिर्फ घोटाला नहीं—जनता के विश्वास और सरकारी तंत्र की साख पर हमला है।”

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