जिंदादिल
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अरे रे… लतीष, तुम ऐसे कैसे चले गए…?
जीवन में मैंने हमेशा बुज़ुर्ग मित्र बनाए, कुछ हमउम्र भी हैं और कुछ मुझसे पंद्रह–बीस–तीस वर्ष छोटे भी। संख्या चाहे…
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