### मुगल रोड पर वन्यजीव इको-टूरिज्म हट का मंत्री जावेद अहमद राणा ने किया उद्घाटन
1.87 करोड़ रुपये की लागत से तैयार सुविधा से सुरनकोट और पुंछ में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
राजेश कुमार, पुंछ
लोकेशन मेंढर
मेंढर/सुरनकोट, 9 अक्टूबर: जम्मू-कश्मीर सरकार में जल शक्ति, वन, पारिस्थितिकी, पर्यावरण एवं जनजातीय मामलों के मंत्री जावेद अहमद राणा ने आज पुंछ जिले के सुरनकोट क्षेत्र में मुगल रोड पर नवनिर्मित वन्यजीव इको-टूरिज्म हट का उद्घाटन किया। वन्यजीव संरक्षण विभाग द्वारा यूटी कैपेक्स बजट के तहत लगभग 1.87 करोड़ रुपये की लागत से इस सुविधा का निर्माण किया गया है।
इस इको-टूरिज्म हट के शुरू होने से क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं को मजबूती मिलने के साथ-साथ प्राकृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। मुगल रोड अपने खूबसूरत प्राकृतिक नजारों, हरे-भरे जंगलों और समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। ऐसे में यह नई सुविधा पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को पर्यटकों के सामने प्रस्तुत करने के साथ-साथ वन्यजीवों, नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और पर्यावरणीय विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इसके माध्यम से प्रकृति आधारित पर्यटन को प्रोत्साहित करने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर पैदा करने की भी उम्मीद है।
यह पहल मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित रखते हुए पर्यटन ढांचे का विकास किया जा रहा है। इससे सुरनकोट और पूरे पुंछ जिले में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावना है।
इस अवसर पर मंत्री जावेद अहमद राणा ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यटन से जुड़ी योजनाओं को इस तरह लागू किया जाना चाहिए कि क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत और पर्यावरणीय संतुलन सुरक्षित रहे तथा आने वाली पीढ़ियां भी इसका लाभ उठा सकें।
उन्होंने टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया कि पर्यटन क्षेत्र से पैदा होने वाले आर्थिक अवसरों का लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचे।
वन्यजीव इको-टूरिज्म हट का उद्घाटन पुंछ जिले में प्रकृति आधारित पर्यटन के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को नई पहचान मिलने, वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
