120-125 किमी दूर जाएगा तो आदिवासी-ग्रामीण बच्चों को कैसे मिलेगा लाभ?
रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597
मनावर। जिला धार।। स्वीकृत नवीन जवाहर नवोदय विद्यालय को तारापुर, तहसील धरमपुरी में स्थापित किए जाने के निर्णय ने मनावर विधानसभा क्षेत्र में नई बहस छेड़ दी है। नवोदय संघर्ष समिति सहित क्षेत्र के प्रबुद्धजनों, विद्यार्थियों और अभिभावकों ने अब खुलकर सवाल उठाया है—जब विद्यालय का उद्देश्य दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा देना है, तो मनावर विधानसभा के बच्चों को इससे दूर क्यों रखा जा रहा है? समिति ने कहा कि यह किसी क्षेत्र के विरोध की लड़ाई नहीं, बल्कि मनावर क्षेत्र के विद्यार्थियों के भविष्य और उनके अधिकार की लड़ाई है। यदि विद्यालय का स्थान तय करते समय सबसे पिछड़े, आदिवासी एवं दूरस्थ गांवों के विद्यार्थियों की पहुंच को प्राथमिकता दी जानी है, तो मनावर तहसील को नजरअंदाज करने के निर्णय की पुनः समीक्षा होना जरूरी है।
*सवाल सिर्फ नवोदय का नहीं, जनप्रतिनिधियों की भूमिका का भी*
समिति ने अब जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। क्षेत्र की जनता का कहना है कि विकास और शिक्षा से जुड़े ऐसे फैसलों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व का वास्तविक अर्थ तभी है, जब जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की जनता की आवाज मजबूती से शासन तक पहुंचाएं।
मनावर विधानसभा के लोगों का सीधा सवाल है—“यदि मनावर में नवोदय विद्यालय स्थापित होने से क्षेत्र के हजारों आदिवासी-ग्रामीण विद्यार्थियों को लाभ मिल सकता है, तो मनावर के पक्ष में मजबूती से आवाज कौन उठाएगा?”
समिति ने जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि इस मुद्दे को राजनीतिक दलों की सीमाओं से बाहर निकालकर क्षेत्र के बच्चों के भविष्य का विषय माना जाए।
*अंतिम गांवों से 120-125 किमी दूरी, फिर किसके लिए नवोदय?*
समिति के अनुसार गंधवानी विकासखंड के बाग क्षेत्र में अलीराजपुर जिले की सीमा से लगे अंतिम गांवों से तारापुर की दूरी करीब 120 से 125 किलोमीटर है। डही क्षेत्र के अंतिम गांवों से भी तारापुर की दूरी लगभग इतनी ही बताई गई है। ऐसे में दूरस्थ आदिवासी विद्यार्थियों के लिए इतनी लंबी दूरी का सवाल स्वाभाविक रूप से सामने आता है। समिति का तर्क है कि यदि विद्यालय उन्हीं बच्चों के लिए है, जो ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों से आते हैं, तो स्थान ऐसा होना चाहिए जहां अधिकतम जरूरतमंद विद्यार्थी आसानी से पहुंच सकें।
*मनावर के पक्ष में स्वास्थ्य, भवन और पानी का तर्क*
समिति ने मनावर को व्यावहारिक विकल्प बताते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं का भी हवाला दिया है। मनावर से बड़वानी करीब 28 किलोमीटर दूर है, जहां शासकीय अस्पताल सहित बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। आवासीय विद्यालय में किसी आपात स्थिति में विद्यार्थियों को समय पर उपचार मिलना महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही मनावर में विद्यालय संचालन के लिए भवन उपलब्ध होने तथा अस्थायी कक्षाओं की व्यवस्था किए जाने की संभावना बताई गई है। पानी और अन्य मूलभूत संसाधनों की उपलब्धता को भी समिति ने मनावर के पक्ष में महत्वपूर्ण आधार बताया है।
*जनता पूछ रही—मनावर के बच्चों की आवाज कौन बनेगा?*
नवोदय संघर्ष समिति का कहना है कि “मनावर में ही नवोदय क्यों?” अब केवल संघर्ष समिति का नारा नहीं रह गया है, बल्कि यह क्षेत्र के विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है। समिति ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि स्थान को अंतिम रूप देने से पहले भौगोलिक दूरी, विद्यार्थियों की पहुंच, स्वास्थ्य सुविधाएं, भवन, पानी और अन्य संसाधनों का तुलनात्मक एवं निष्पक्ष आकलन कराया जाए।
*अब फैसला सिर्फ स्थान का नहीं, राजनीतिक इच्छाशक्ति का भी*
समिति ने स्पष्ट कहा कि मांग किसी दूसरे क्षेत्र को उसका अधिकार देने से रोकने की नहीं है। मांग सिर्फ इतनी है कि जिस क्षेत्र के विद्यार्थियों को इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है, वहां नवोदय विद्यालय की सुविधा पहुंचे। जनप्रतिनिधियों से भी स्पष्ट अपील की गई है कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर शासन के समक्ष मनावर के पक्ष को मजबूती से रखें और स्थान परिवर्तन की पुनः समीक्षा के लिए पहल करें। मनावर की जनता अब सिर्फ घोषणा नहीं, अपने क्षेत्र के पक्ष में ठोस पहल चाहती है। मनावर में नवोदय—सिर्फ एक विद्यालय की मांग नहीं, आदिवासी-ग्रामीण विद्यार्थियों के भविष्य की मांग है।
