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बीजेपी के नेता धरना देने का नाटक कर राजनीति करने की जगह समाधान निकाले

दीपक शर्मा की रिपोर्ट

कदवाल पहुंचे महेश पटेल, जल जीवन मिशन, जमीन और खनन के मुद्दे पर ग्रामीणों से की चर्चा; भाजपा नेताओं के धरने पर भी उठाए सवाल

कदवाल :- (आलीराजपुर जिला)इंदवान पंचायत के अंतर्गत कदवाल गांव में जल जीवन मिशन के अंतर्गत चल रहे कार्य को लेकर आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ग्रामीणों के बीच पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर पानी, पाइपलाइन, टंकी, जमीन, ग्राम सभा और क्षेत्र में चल रही खनन गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। महेश पटेल ने सबसे पहले जल जीवन मिशन के कार्य को लेकर ग्रामीणों की शंकाओं को दूर करते हुए कहा कि यह काम किसी की जमीन छीनने के लिए नहीं, बल्कि गांव में पानी पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि वे चिंता न करें। योजना का उद्देश्य गांव के प्रत्येक परिवार तक पानी पहुंचाना है।

उन्होंने कहा कि गांवों में पानी की समस्या गंभीर है और गर्मी के दिनों में ग्रामीणों को पानी के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। ऐसे में जल जीवन मिशन के माध्यम से पाइपलाइन, टंकी और जल व्यवस्था का काम पूरा होना जरूरी है। महेश पटेल ने कहा कि यदि नर्मदा नदी के पानी को उचित व्यवस्था और पाइपलाइन के माध्यम से गांवों तक पहुंचाया जाए तो कई गांवों की पानी की समस्या दूर हो सकती है। उन्होंने कहा कि पानी की योजना केवल टंकी बनाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हर घर तक पानी पहुंचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि टंकी तैयार है या नहीं, पाइपलाइन कहां तक पहुंची है और पानी ग्रामीणों के घरों तक कब पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि यदि छह-सात गांवों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था हो जाए तो क्षेत्र की बड़ी समस्या का समाधान हो सकता है। ग्राम पंचायत की अनुमति लेकर कार्य करने की हिदायत

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महेश पटेल ने जल जीवन मिशन के कार्य में लगे ठेकेदार और संबंधित विभाग के अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा कि ग्राम पंचायत को विश्वास में लेकर और ग्राम पंचायत की अनुमति से कार्य किया जाए।

 

उन्होंने कहा कि विकास कार्य ग्रामीणों की सुविधा के लिए होते हैं, इसलिए कार्य करते समय ग्रामीणों और पंचायत को जानकारी में रखना जरूरी है। यदि पाइपलाइन या किसी अन्य कार्य के लिए किसी ग्रामीण की निजी जमीन प्रभावित होती है तो नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जाए और संबंधित ग्रामीण को जानकारी दी जाए।

उन्होंने कहा—

“यह जमीन छीनने का काम नहीं है, गांव में पानी पहुंचाने का काम है। ग्रामीण चिंता न करें, लेकिन विभाग और ठेकेदार ग्राम पंचायत की अनुमति लेकर ही कार्य करें।”

उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि योजनाओं का काम केवल कागजों पर पूरा नहीं दिखना चाहिए, बल्कि जमीन पर उसका लाभ ग्रामीणों को मिलना चाहिए।

ग्राम सभा की भूमिका पर जोर

ग्रामीणों से बातचीत के दौरान महेश पटेल ने ग्राम सभा के अधिकारों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि गांव की जमीन और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में ग्रामीणों को जागरूक रहना होगा।

उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि यदि किसी गांव की जमीन से संबंधित कोई प्रस्ताव, टेंडर या अन्य प्रक्रिया चल रही है तो उसकी जानकारी ली जाए और ग्राम सभा में ग्रामीण अपनी बात रखें।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की जमीन से जुड़े मामलों को लेकर किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए। ग्राम सभा में चर्चा हो, ग्रामीणों को पूरी जानकारी मिले और नियमानुसार निर्णय लिया जाए।

जमीन और खनन के मुद्दे पर महेश पटेल ने जताई चिंता

महेश पटेल ने क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर खनन और जमीन से जुड़ी प्रक्रियाओं का उल्लेख करते हुए ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कुंदन गोल्ड माइंस, कोल इंडिया तथा अन्य कंपनियों से जुड़ी प्रस्तावित गतिविधियों और टेंडर प्रक्रिया का उल्लेख किया।

उन्होंने क्षेत्र के विभिन्न गांवों और फलियों का जिक्र करते हुए कहा कि ग्रामीणों को अपने गांव की जमीन से संबंधित किसी भी प्रक्रिया की जानकारी रखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की जमीन केवल जमीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि उसकी पहचान, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों से जुड़ी हुई है।

महेश पटेल ने कहा कि वे किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं बल्कि पूरे आदिवासी समाज के लिए आवाज उठा रहे हैं।

“हम अपने लिए नहीं लड़ रहे हैं। हम पूरे समाज के लिए लड़ रहे हैं। आज जमीन का सवाल है तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी इसी से जुड़ा है।”

भाजपा नेताओं के धरने पर महेश पटेल का सवाल

जमीन और खनन के मुद्दे को लेकर धरना दे रहे भाजपा नेताओं पर भी महेश पटेल ने सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि यदि भाजपा नेता वास्तव में आदिवासी समाज के हितैषी हैं और उन्हें आदिवासियों की जमीन की चिंता है तो उन्हें धरने की राजनीति करने के बजाय अपनी सरकार के सामने जाकर इसका समाधान कराना चाहिए।

महेश पटेल ने कहा—

“आप किसके खिलाफ धरने पर बैठे हो? दिल्ली में मोदी सरकार आपकी है, मध्यप्रदेश में मोहन यादव की भाजपा सरकार आपकी है, आपके मंत्री आलीराजपुर-झाबुआ में हैं और आपका सांसद भी भाजपा का है। फिर किसके खिलाफ धरना दे रहे हो?”

उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में आदिवासियों की जमीन की चिंता है तो भोपाल जाओ, मुख्यमंत्री से मिलो और जमीन से जुड़े सारे लेटर एवं प्रस्ताव कैंसिल करवाकर लाओ।

उन्होंने कहा—

“अगर वास्तव में आदिवासियों के हितैषी हो और जमीन को लेकर चिंता है तो मुख्यमंत्री से मिलकर सारे लेटर कैंसिल करवाओ। तभी माना जाएगा कि आप वास्तव में आदिवासियों के हितैषी हो।”

महेश पटेल ने भाजपा नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि अभी तक जिन मामलों को अफवाह बताया जा रहा था, अब उसी मुद्दे को लेकर धरना दिया जा रहा है।

उन्होंने सवाल किया—

“अभी तक तो आप इसे अफवाह कह रहे थे। अब नींद से जागे हैं तो अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर क्यों बैठे हो? अगर मामला गलत है तो धरना क्यों? और अगर सही है तो मुख्यमंत्री से मिलकर

इसे रद्द क्यों नहीं करवाते?”

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को केवल भाषण और बयान नहीं चाहिए, बल्कि जमीन पर ठोस कार्रवाई चाहिए।

“कलेक्टर से लेकर भोपाल तक जाएंगे”

महेश पटेल ने कहा कि ग्रामीणों की जमीन, पानी और अन्य अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर आवश्यकता पड़ने पर कलेक्टर से मुलाकात की जाएगी और धरना भी दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जहां जरूरत होगी, वहां ग्रामीणों के साथ जाकर अधिकारियों से बात की जाएगी। यदि किसी समस्या का समाधान स्थानीय स्तर पर नहीं होता है तो उसे जिला और प्रदेश स्तर तक उठाया जाएगा।

उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि वे एकजुट रहें और किसी भी मुद्दे पर अकेले संघर्ष करने के बजाय ग्राम सभा के माध्यम से सामूहिक रूप से अपनी बात रखें।

“आदिवासी समाज खुद अपनी लड़ाई लड़ेगा”

महेश पटेल ने कहा कि आदिवासी समाज को अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए स्वयं जागरूक और संगठित होना होगा।

उन्होंने कहा—

“आदिवासी समाज की लड़ाई कोई और आकर नहीं लड़ेगा। न कांग्रेस लड़ेगी, न भाजपा लड़ेगी। आदिवासी समाज को खुद अपने जल, जंगल और जमीन के लिए खड़ा होना होगा। मैं आपके साथ हूं और जहां जरूरत होगी, वहां आपके साथ खड़ा रहूंगा।”

उन्होंने कहा कि चाहे दिन हो या रात, यदि ग्रामीणों को उनके अधिकारों के लिए कहीं जाने की जरूरत पड़ी तो वे उनके साथ रहेंगे।

सड़क, गड्ढों और विकास कार्यों का मुद्दा भी उठा

चर्चा के दौरान क्षेत्र की खराब सड़कों, गड्ढों और विकास कार्यों से जुड़ी समस्याओं पर भी बात हुई। महेश पटेल ने कहा कि खराब सड़कों के कारण ग्रामीणों को परेशानी होती है और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विकास कार्यों में लापरवाही नहीं होनी चाहिए और जिन कामों की जरूरत है, उन्हें प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाना चाहिए।

अधिकारियों की जवाबदेही तय हो

महेश पटेल ने कहा कि यदि किसी योजना के क्रियान्वयन में अधिकारियों की लापरवाही के कारण ग्रामीण परेशान होते हैं तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को योजनाओं के नाम पर केवल आश्वासन नहीं, बल्कि वास्तविक सुविधा चाहिए।

उन्होंने जल जीवन मिशन को लेकर कहा कि टंकी बनना, पाइपलाइन बिछना और कागजों में योजना पूरी होना पर्याप्त नहीं है। जब तक गांव के लोगों को नियमित पानी नहीं मिलेगा, तब तक योजना का उद्देश्य पूरा नहीं माना जा सकता।

ग्रामीणों ने रखी अपनी समस्याएं

इस दौरान ग्रामीणों ने पानी, पाइपलाइन, टंकी, जमीन और अन्य स्थानीय समस्याओं को लेकर महेश पटेल के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को संबंधित विभाग और अधिकारियों के सामने रखा जाएगा।

महेश पटेल ने कहा कि विकास कार्य भी होने चाहिए और ग्रामीणों के अधिकार भी सुरक्षित रहने चाहिए।

उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के कार्य में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए, लेकिन ठेकेदार और विभाग को ग्राम पंचायत तथा ग्रामीणों को विश्वास में लेकर ही कार्य आगे बढ़ाना चाहिए।

अंत में महेश पटेल ने कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य गांव में पानी पहुंचाना है, जमीन छीनना नहीं। वहीं जमीन और खनन से जुड़े मामलों में ग्रामीणों के अधिकार, ग्राम सभा की भूमिका और पारदर्शिता का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां आदिवासी समाज के अधिकारों का सवाल होगा, वहां वे ग्रामीणों के साथ खड़े रहेंगे और जरूरत पड़ने पर संघर्ष को आगे बढ़ाया जाएगा।

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