
गयाजी में विष्णुपद घाट पर शहीद लेफ्टिनेंट शुभम का अंतिम संस्कार

छोटे भाई छोटू ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 9 बजे भैया से वीडियो कॉल पर बात हुई थी। वह कह रहे थे कि बारिश तेज हो रही है। अभी जल्दबाजी में हूं, फ्री होने के बाद बात करूंगा। उस समय वह बिल्कुल सामान्य और खुश नजर आ रहे थे। इसके बाद सुबह 11 बजे एक अधिकारी का फोन आया। उन्होंने घटना की जानकारी दी और बताया कि भैया का भी निधन हो गया है। शुरुआत में हमलोगों को विश्वास नहीं हुआ। ऐसा लगा कि कोई गलत या भ्रामक सूचना होगी। इसके बाद दोबारा मेरे मोबाइल पर कॉल आया, जिसके बाद हादसे की पुष्टि हुई। यह सुनते ही मां बेहोश होने लगीं। पिता, दादा और पूरा परिवार सदमे में चला गया। ऐसा लगा जैसे पूरा परिवार टूट गया हो।शुभम के दादा योगेंद्र शर्मा ने कहा कि शुभम हमारी बहुत बड़ी उम्मीद था। उसके साथ अभी बहुत सारी खुशियां बांटनी थीं। जाने की उम्र मेरी थी, लेकिन वह चला गया। दादा ने कहा कि न्यूज में सुना हूं कि मेरा पोता जिस विमान में था, वह 40 साल पुराना था। उसकी हालत ठीक नहीं थी, फिर भी उसका इस्तेमाल किया जा रहा था। यह पूरी तरह से सिस्टम की लापरवाही है। सरकार की व्यवस्था में खामियां हैं कि ऐसे जहाज का इस्तेमाल वीर जवानों के लिए किया जा रहा है, जो कभी भी संकट पैदा कर सकता है। मैं इतना कहता हूं कि चाहे मेरी पेंशन बंद कर दें, लेकिन सेना में इस्तेमाल होने वाले विमान और दूसरे उपकरण दुरुस्त रखें, ताकि वीर जवानों की शहादत न हो।नाना सरजू शर्मा ने बताया कि मेरे नाती की मौत के लिए सिर्फ सरकार जिम्मेदार है। देश की सेवा करने वाला ही देश में सुरक्षित नहीं है। एक वक्त के बाद इंसान काम का नहीं रहता, लेकिन हमारी सरकार पुराने विमान को मिशन पर भेज रही है।मेरा बच्चा बहुत प्यारा था। वह हर किसी की इज्जत करता था। 25 साल की उम्र में उसने बहुत कुछ हासिल कर लिया था। उसका नाम लेने पर सीना चौड़ा हो जाता था।

शहीद शुभम कुमार की मां पूनम देवी ने बताया, ‘शनिवार सुबह करीब 6 बजे बेटे का फोन आया था। उसने वीडियो कॉल पर कहा था, ‘मम्मी, हम मिशन पर जा रहे हैं। आप ठीक से रहिएगा और अपना ध्यान रखिएगा। 29 मई को वह घर से ड्यूटी पर गया था। हमें नहीं पता था कि मेरा बेटा आखिरी बार घर से जा रहा है और फिर कभी लौटकर नहीं आएगा। अगर यह पता होता तो मैं उसे जाने नहीं देती।’ शुभम की मां आगे कहती हैं कि उसकी शादी पहले दिसंबर में तय थी, लेकिन दादी के निधन के कारण तारीख आगे बढ़ा दी गई थी। हमने सोचा था कि होली के बाद उसकी शादी करवा देंगे, लेकिन उससे पहले ही मेरा बेटा हमें छोड़कर चला गया।


