
सफलता_की_कहानी :दूध डेयरी से आत्मनिर्भर बनीं सुनीता चौधरी, ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
अथक परिश्रम से सालाना 2 लाख 4 हजार की आय, आत्मनिर्भर बन संवरी जीवन की दिशा
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
पांढुर्णा जिले के ग्राम मोरडोंगरी की निवासी सुनीता चौधरी आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने साहस, मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर डेयरी व्यवसाय को अपनाकर आत्मनिर्भरता की एक सशक्त मिसाल प्रस्तुत की है।
सुनीता चौधरी वाणी स्वसहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। समूह से मिली प्रेरणा और सहयोग के चलते उन्होंने दूध डेयरी का कार्य प्रारंभ करने का निर्णय लिया। इस व्यवसाय की शुरुआत के लिए उन्होंने कुल 65 हजार रुपये की लागत लगाई, जिसमें से 50 हजार रुपये का ऋण समूह से प्राप्त किया तथा 15 हजार रुपये स्वयं निवेश किए।

शुरुआती दौर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन सुनीता ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने पशुपालन के आधुनिक तरीकों को अपनाया और पशुओं की नियमित देखभाल पर विशेष ध्यान दिया। उनकी लगन और निरंतर प्रयासों का परिणाम यह रहा कि धीरे-धीरे दूध उत्पादन में वृद्धि होने लगी और उनका व्यवसाय स्थिरता की ओर बढ़ा।
आज सुनीता चौधरी अपने डेयरी व्यवसाय से प्रतिमाह लगभग 17 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं, जिससे उनकी वार्षिक आय 2 लाख 4 हजार रुपये तक पहुंच गई है। इस आय ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया है, बल्कि बच्चों की शिक्षा और घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति भी अब बेहतर ढंग से हो पा रही है।
सुनीता की सफलता यह सिद्ध करती है कि यदि सही मार्गदर्शन, समूह का सहयोग और आत्मविश्वास हो, तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।