

हमीरपुर से ब्यूरो चीफ राजकुमार की रिपोर्ट
मौदहा (हमीरपुर)। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी के निर्देशानुसार शिक्षकों की ड्यूटी उचित दर की दुकानों पर लगाई गई है। लेकिन जमीनी स्तर पर इस आदेश की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कस्बे के एक उचित दर विक्रेता की दुकान पर तैनात शिक्षक की बड़ी लापरवाही का मामला प्रकाश में आया है।
सुबह 11 बजे तक नहीं पहुंचे शिक्षक
जानकारी के अनुसार, मीरा देवी के उचित दर वितरण केंद्र (कोटा) पर शिक्षक अवधेश कुमार की तैनाती की गई थी। 11 अप्रैल को वितरण केंद्र के संचालक ने मीडिया को बताया कि उनकी दुकान सुबह 9:00 बजे ही खुल गई थी। हालांकि, उस समय वितरण केंद्र पर तैनात अध्यापक वहां मौजूद नहीं थे। हैरानी की बात यह रही कि मीडिया की टीम ने जब सुबह 11:00 बजे तक वहां पड़ताल की, तब भी शिक्षक अवधेश कुमार अपने ड्यूटी स्थल पर नहीं पहुंचे थे।
दोनों स्थानों से अनुपस्थित रहने का खेल
जांच में यह भी तथ्य सामने आया कि संबंधित शिक्षक ने विद्यालय में अपनी उपस्थिति तो दर्ज कराई थी, लेकिन उसके बाद वे कोटा ड्यूटी के नाम पर वहां से निकल गए। इस प्रकार वे न तो अपने आवंटित वितरण केंद्र पर मौजूद मिले और न ही विद्यालय में। शिक्षक की इस “डबल अनुपस्थिति” ने विभागीय कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल
ड्यूटी के नाम पर सरकारी कार्यों से गायब रहने की इस प्रवृत्ति से न केवल बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली की शुचिता पर भी संकट मंडरा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि शिक्षक इसी तरह अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते रहे, तो शासन की पारदर्शी वितरण की मंशा कभी पूरी नहीं हो पाएगी।
कार्रवाई की मांग
लोगों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि ड्यूटी स्थल से घंटों गायब रहने वाले शिक्षक के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो सके।