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किसान कंसल्टेंसी एंड सॉइल टेस्टिंग प्रा. लि., मोर्शी द्वारा संत्रा-मौसंबी फसल महाचर्चा सत्र आयोजित, आधुनिक कृषि तकनीकों की दी गई विस्तृत जानकारी*

*किसान कंसल्टेंसी एंड सॉइल टेस्टिंग प्रा. लि., मोर्शी द्वारा संत्रा-मौसंबी फसल महाचर्चा सत्र आयोजित, आधुनिक कृषि तकनीकों की दी गई विस्तृत जानकारी*

संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश

पांढुरना – किसानों को वैज्ञानिक खेती की ओर प्रेरित करने, खेती की लागत कम करने तथा उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से किसान कंसल्टेंसी एंड सॉइल टेस्टिंग प्रा. लि., मोर्शी द्वारा संत्रा एवं मौसंबी फसल पर एक ज्ञानवर्धक “पिक महाचर्चा सत्र” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पांढुर्णा जिले के ग्राम कलमगांव में किसान रवि कोरड़े के खेत पर संपन्न हुआ, जिसमें क्षेत्र सहित महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।


कार्यक्रम में उपस्थित कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विशेष रूप से मिट्टी परीक्षण (सॉइल टेस्टिंग) के महत्व को समझाते हुए बताया गया कि फसल की अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी की जांच बेहद आवश्यक है। मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही खेत में आवश्यक पोषक तत्वों की सही मात्रा का निर्धारण किया जा सकता है, जिससे उर्वरकों का संतुलित उपयोग होता है और अनावश्यक खर्च से भी बचाव होता है।
इसके साथ ही खाद एवं पोषक तत्व प्रबंधन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि संत्रा और मौसंबी जैसी बागवानी फसलों में समय-समय पर आवश्यक पोषक तत्व देना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। संतुलित खाद प्रबंधन से फलों की गुणवत्ता बेहतर होती है, पौधों की वृद्धि अच्छी होती है और उत्पादन में भी वृद्धि होती है।
कार्यक्रम के दौरान ड्रिप सिंचाई प्रणाली के लाभों पर भी विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। किसानों को बताया गया कि ड्रिप प्रणाली के माध्यम से पानी की बचत होती है और पौधों की जड़ों तक सीधे पानी व घुलनशील उर्वरक पहुंचाने से फसल का विकास बेहतर होता है। इससे उत्पादन लागत कम होने के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता भी बढ़ती है।
इस अवसर पर सौसर क्षेत्र के पूर्व विधायक अजय चौरे विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में किसानों के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने पर ही किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। उन्होंने ऐसे प्रशिक्षण और मार्गदर्शन कार्यक्रमों को किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए आयोजन की सराहना की।
कार्यक्रम के आयोजन में गौरव तयवाड़े, यशदीप गिरसे, नितिन मूलगरे और अनिकेत तयवाड़े ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने किसानों को मिट्टी परीक्षण की प्रक्रिया, उर्वरक प्रबंधन, बागवानी फसलों की देखभाल तथा ड्रिप सिंचाई के उचित उपयोग और रखरखाव के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी।
इस महाचर्चा सत्र में पांढुर्णा और सौसर क्षेत्र के किसानों के अलावा महाराष्ट्र के अहिल्यानगर, बीड, परभनी और लातूर जिलों से भी किसान बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम में बंडू जी बेंडे, बलवंत जी फोले, कैलाश ठाकरे, गजानन कोचे सहित अनेक प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में किसानों ने विशेषज्ञों से अपने खेतों में आने वाली समस्याओं के संबंध में प्रश्न पूछे, जिनका समाधान विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से बताया गया। किसानों ने इस प्रकार के ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों को भविष्य में भी आयोजित करने की मांग की और कहा कि इससे उन्हें आधुनिक खेती की नई जानकारी मिलती है, जिससे वे अपनी खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं।

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