

रिपोर्टर : दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597
मनावर। जिला धार।। गणगौर पर्व निमाड़ क्षेत्र की आस्था और परंपरा से जुड़ा हुआ प्रमुख त्योहार है। 14 मार्च शनिवार को माता की मूठ रखी जाएगी। शुक्रवार और शनिवार को महिलाएं बांस की टोकरी, गेहूं व दीपक लेकर गणगौर के गीत गाते हुए बाड़ी स्थल पर पहुंचेगी तथा पंडितजी को सामग्री दी जाएगी। 14 मार्च को ही पंडितजी द्वारा शुभ मुहूर्त में बांस की टोकरी में गेहूं बोएं जायेंगे जिसे माता की मूठ रखना कहते हैं। इन 7 दिनों तक पंडित जी माता की विधि विधान से सेवा करेंगे तथा जवारे को सींचा जाएगा। माता के मूठ रखने के बाद बाड़ी की पवित्रता बनाए रखने के लिए वहां पर पर किसी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश निषेध रहेगा। 21 मार्च गणगौर तीज पर माता पाट पर बैठेगी तथा इस दिन बाड़ी श्रद्धालुओं के लिए खोली जाएगी। श्रद्धालु विधि विधान से पूजन कर जवारे को रथ में विराजित कर बैंडबाजे के साथ अपने घर ले जाएंगे। इस दौरान सात दिनों तक महिलाएं बाड़ी स्थल पर ईश्वर राजा रणू बाई के गीत गाती है तथा महिलाएं दूल्हा दुल्हन का वेश धारण कर पाती निकालती है। बताया जाता है इस वर्ष 14 मार्च शनिवार को माता के मुठ रखी जाएगी तथा 21 मार्च शनिवार को प्रातः 4 बजे से ही माता के पट खोले जाएंगे।
गणगौर पर्व राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात का एक प्रमुख सांस्कृतिक त्योहार है, जो चैत्र माह के पहले दिन से 16 दिनों तक मनाया जाता है। यह भगवान शिव (गण) और माता पार्वती (गौर) के मिलन और पूजा का प्रतीक है। विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए और अविवाहित लड़कियां अच्छे वर के लिए यह व्रत रखती हैं। गणगौर में ‘गण’ का अर्थ शिव और ‘गौर’ का अर्थ पार्वती है, जो वैवाहिक सुख का प्रतीक हैं। यह होली के अगले दिन से शुरू होकर 16 दिनों तक चलता है। महिलाएं मिट्टी लकड़ी या धातु की गौर (पार्वती) और ईसर (शिव) की प्रतिमाएं बनाती हैं और पूजा करती हैं। रंगीन पारंपरिक पोशाक पहनकर, मेहंदी लगाकर समूह में लोकगीत गाए जाते हैं। अंत में, मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है।
सांस्कृतिक महत्व यह बसंत ऋतु, नई फसल, प्रेम और अखंड सौभाग्य का उत्सव है। गणगौर का पर्व विशेष रूप से समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को दर्शाता है। भारत विविध त्योहारों का देश है। इसमें विभिन्न राज्यों और उनकी संस्कृति के रंग भरे हुए हैं। एक कहावत है “सात वार और नौ त्यौहार” अर्थात सप्ताह में केवल 7 दिन होते हैं लेकिन त्यौहार नौ होते हैं। गणगौर या गौरी तृतीया एक जीवंत धार्मिक त्योहार है जो देवी पार्वती और भगवान शिव के दिव्य प्रेम का जश्न मनाता है। गणगौर होली के बाद मनाया जाता है। गणगौर त्यौहार बड़े पैमाने पर मध्यप्रदेश राजस्थान और उत्तर प्रदेश गुजरात में भव्यता से मनाया जाता है। इन राज्यों के अलावा हरियाणा में भी गणगौर मनाया जाता है। हर राज्य की संस्कृति उसके रीति-रिवाजों, वेशभूषा और त्योहारों में दिखाई देती है। भारत के हर राज्य की अपनी अपनी खासियत है जिसमें त्यौहार बहुत महत्वपूर्ण हैं। राजस्थान, भारत का उत्तरी राज्य, मारवाड़ियों का राज्य है। गणगौर मारवाड़ियों का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। राजस्थान ही नहीं बल्कि हर राज्य में रहने वाले मारवाड़ी इस त्योहार को पूरे रीति-रिवाज के साथ मनाते हैं। गणगौर को अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। मध्य प्रदेश के निमाड़ी लोग भी इसे मारवाड़ियों की तरह ही उतने ही उत्साह से मनाते हैं। दोनों समुदायों की पूजा पद्धतियां अलग-अलग हैं जबकि त्योहार एक ही है। मारवाड़ी लोग सोलह दिनों तक गणगौर की पूजा करते हैं लेकिन निमाड़ी लोग केवल तीन दिन ही गणगौर मनाते हैं।
गणगौर त्योहार विवाहित महिलाओं के लिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि वे अपने पतियों के स्वस्थ जीवन और स्वस्थ वैवाहिक संबंधों के लिए देवी पार्वती की पूजा करती हैं। भगवान शिव जैसा समझदार और सबसे अच्छा पति पाने के लिए कुंवारी लड़कियां भी पूजा और गणगौर उत्सव में भाग लेती है। निमाड़ में अगर त्योहारों का शुभारंभ लोकपर्व जीरोती से होता है तो समापन भी लोकपर्व गणगौर पर ही होता है। गणगौर महापर्व चैत्र ग्यारस से प्रारम्भ हो जाता है। निमाड़ लोकमाताओं की माता ‘गणगौर’ माता का पर्व मनाया जाता है। वह देवियों की भी देवी महादेवी है। वह समग्र लोक की भक्ति को आलोकित करने वाली परम शक्ति है। गणगौर माता लौकिक के साथ साथ अलौकिक देवी भी है। उनका महापर्व यहाँ की आत्मा है। तभी तो उनके निमाड़ी लोकगीत, रीति-रिवाज, प्रथा-परम्पराएँ, पूजा आराधना, संस्कार संस्कृति आदि लगभग ज्यों के त्यों है। सम्पूर्ण निमाड़ में गणगौर माता को सर्वोच्च सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त है। निमाड़ में माता का अनुष्ठान पर्व नौ-दस दिनों तक उमंग और हर्सौल्लास से मनाया जाता है I निमाड़ में जिन घरों में माता की “पावणी” लाया जाता है I उन घरों की बहू-बेटियां आठ-दस दिन पूर्व से ही तैयारी करने लग जाती है I घर के कोने कोने को साफ स्वच्छता करती है I पूर्ण पवित्रता व उमंगता से पूरे घर की लिपाई-छबाई व पुताई की जाती है घर को संजाती-संवारती है I यहाँ तक की घर के कपड़े और ओड़ाने बिछाने को भी नदी-तालाब पर धोकर लाया जाता है।कहने का तात्पर्य घर की सम्पूर्ण स्वच्छता की जाती है। गणगौर माता का अनुष्ठान चैत्रवदी ग्यारस से चैत्र सुदी पंचमी तक चलता है I जिसमे चैत्र की ग्यारस को माता की मूठ रखी जाती है I मूठ रखना याने माता के प्रतीक स्वरुप गेहूं के जवारे उगाने हेतु बांस की नन्हीं-नन्हीं टोकनियों में पारम्परिक तरीके से गेहूं बोकर माता की प्राण-प्रतिष्ठा की जाती हैI इस अवसर पर घर परिवार के परिजन नए कपड़े पहनते हैं।