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शासकीय आदर्श महाविद्यालय डिंडौरी में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन

‘‘भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का क्रियान्वयन’’

डिंडौरी : 17 फरवरी, 2026
शासकीय आदर्श महाविद्यालय डिंडौरी द्वारा 17 से 18 फरवरी 2026 तक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन ‘‘भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का क्रियान्वयन’’ विषय पर किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि विधायक ओमप्रकाश धुर्वे, कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. सुरेन्द्र सिंह परिहार, क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक जबलपुर संभाग प्रो. पी.आर. चंदेलकर, नोडल अधिकारी नई शिक्षा नीति मध्यप्रदेश प्रो. सुशील दुबे तथा प्राचार्य डॉ. अजय कोष्टा द्वारा मां सरस्वती के तैलचित्र पर दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण कर किया गया। इसके पश्चात छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ एवं राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से की गई।
सेमीनार में विद्वानों द्वारा नई शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न आयामों पर विस्तार से विचार रखे गए। वक्ताओं ने क्रेडिट सिस्टम, परीक्षा प्रणाली, मेजर एवं माइनर विषयों की व्यवस्था तथा ओपन इलेक्टिव विषयों के संबंध में अपने विचार साझा किए और इसे विद्यार्थियों के समग्र विकास हेतु उपयोगी बताया। मंच संचालन डॉ. विनीत टांडिया द्वारा किया गया तथा सेमीनार के संयोजक डॉ. कल्पना मिश्रा ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकों के साथ जिले के विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय सेमीनार के दौरान मुख्य अतिथियों के द्वारा शासकीय आदर्श महाविद्यालय के द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आधारित एक स्मारिका का शुभारंभ किया गया। जिससे शिक्षाजगत में एक विशेष पहल के माध्यम से साकारात्मक सोच के साथ छात्र-छात्राओं में संदेश जाएगा।
विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने अपने उद्बोधन में कहा कि छात्र-छात्राएं पुरानी और नई शिक्षा नीति के महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझकर आगे बढ़ें तथा स्वदेशी शिक्षा और स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर आत्मनिर्भर और स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर हों। उन्होंने तुलसीदास और कबीरदास का उदाहरण देते हुए कहा कि महानता केवल डिग्री या उपाधि से नहीं, बल्कि ज्ञान और चिंतन से प्राप्त होती है।
विधायक ने महाविद्यालय में प्रयोगशाला के अभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए विधायक निधि एवं सांसद निधि के सहयोग से नवीन प्रयोगशाला निर्माण का आश्वासन दिया तथा इसके लिए विधायक निधि से राशि जारी करने की बात कही।
कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने अपने उदबोधन में कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहां सर्वप्रथम नवीन शिक्षा नीति को अपनाया गया। शिक्षा का उद्देश्य अलौकिक ज्ञान प्राप्त करना और ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में शिक्षा की समानता होना चाहिए साथ ही साथ कहा कि शिक्षा बच्चों को शारीरिक, मानसिक, शैक्षणिक, सामाजिक, नैतिक शिक्षा के साथ साथ सदभावना सिखाती है जिससे छात्र-छात्राएं आगे बढकर कठिन परिश्रम कर अपनी लक्ष्य को प्राप्त करते हैं। सभी छात्रों को आगे बढने और सफलता प्राप्त करने हेतु मेरी शुभकामनाएं।
दो दिवसीय सेमीनार के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा एवं नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में सार्थक संवाद स्थापित हुआ।

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