

रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597

मनावर। जिला धार।। जिले की धर्म नगरी मनावर में समाधि साधक आचार्य 108 श्री विराग सागर जी महाराज की परम शिष्या आर्यिका 105 विदुषी श्री माताजी ससंघ सान्निध्य में चल रहे नव दिवसीय इंद्रध्वज महामंडल विधान का समापन विश्वशांति महायज्ञ के साथ संपन्न हुआ।
विधानाचार्य अन्नू भैया के निर्देशन में इन्द्र इंद्राणीयों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ में आहुतियां अर्पित की। श्री जी को रजत विमान में विराजमान कर बैंड बाजे की भक्तिमय धुनों के साथ पार्श्वनाथ जिनालय से भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। जिसमें नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। जैन समाज के अध्यक्ष अभय सोगानी ने बताया कि पार्श्वनाथ जिनालय इन्द्र भवन में आर्यिका संघ के सानिध्य में पिच्छिका परिवर्तन समारोह का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन ,पाद प्रक्षालन और अष्ट द्रव्य पूजन से हुई। आर्यिका विदुषी श्री माताजी,विनीत श्री माताजी, विकम्पा श्री माताजी, विरत श्री माताजी,विनोद श्री माताजी को क्रमशः सकल जैन समाज ने नवीन पिच्छिका भेट की।
आचार्य गुरुवर विशुद्ध सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छिका लेने का शौभाग्य नगर गौरव मुनि श्री प्रभात सागर जी आर्यिका विदुषी श्री माताजी की पिच्छिका अनुराग जैन, विनीत श्री माताजी की पिच्छिका अभिषेक सोगानी, विकम्पा श्री माताजी की आयुष जैन, विरत श्री माताजी की प्रतीक बडजात्या बाकानेर, विनोद श्री ए की पिच्छिका आर.सी.जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
विश्व शांति महायज्ञ एवं पिच्छिका परिवर्तन समारोह में बाकानेर, सिंघाना, गंधवानी, डेहरी सहित निमाड़ क्षेत्र से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस अवसर पर विदुषी श्री माताजी ने कहा कि दिगंबर साधु केवल तीन उपकरणों ज्ञान के लिए शास्त्र, शौच के लिए कमंडल और संयम के लिए पिच्छिका का ही उपयोग करते हैं। पिच्छिका उनके लिए अहिंसा और करुणा का प्रतीक है। जिसमें सूक्ष्म जीवो की रक्षा होती है। बिना पिच्छिका के दिगम्बर साधु सात कदम भी नहीं चलते हे।
इस अवसर पर माताजी ने कहा कि जिस प्रकार पिच्छिका का परिवर्तन हो रहा है उसी प्रकार संसार भी परिवर्तनशील है इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में मोक्ष मार्ग पर चलने के लिए जीवन में परिवर्तन लाना चाहिए। समारोह का समापन श्रद्धा, भक्ति और संयम के भावों के साथ हुआ जिसमें हजारों जैन समाज साक्षी बने।