
जय गोमाता, जय गोपाल के नारों से गूंजा जड़खोर गोधाम
गोसेवा से आत्मनिर्भरता तकः जड़खोर गोशाला बनेगी मिसाल – मंत्री जोराराम कुमावत
पन्ना धाय से राम-भरत तक की गाथाएँ हमारी संस्कृति की नींव गृह राज्य मंत्री
रिपोर्टर मननमोहन गुप्ता कामां 9783029649
कामां / डीग देवस्थान, गौपालन, पशुपालन एवं डेयरी विभाग मंत्री जोराराम कुमावत और गृह, गौपालन, पशुपालन, डेयरी तथा मत्स्य विभाग राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने सोमवार को श्रीजड़खोर न्या गोधाम में श्रीकृष्ण-बलराम गो-इस आराधन महोत्सव में शिरकत की। देश महोत्सव में स्वामी श्रीराजेंद्रदास देवाचार्य जी महाराज द्वारा श्रीमद भगवत कथा का वाचन किया जाएगा। श्रीकृष्ण-बलराम गो आराधन महोत्सव 22 सितंबर से 01 अक्टूबर 2025 तक आयोजित किया जाएगा । देवस्थान मंत्री एवं गृह राज्य मंत्री ने सभी से आह्वान किया कि वे गीता के ज्ञान को केवल शास्त्र तक सीमित न रखें, बल्कि इसे व्यवहार और आचरण में भी उतारें। यही गीता का वास्तविक आत्मसात होगा। उन्होंने कहा कि जब समाज गीता के आदशों को अपनाएगा, तब नैतिकता, कर्तव्यनिष्ठा और भाईचारे से परिपूर्ण भारत का निर्माण संभव होगा। देवस्थान, गौपालन, पशुपालन एवं डेयरी विभाग मंत्री जोराराम कुमावत ने आज जड़खोर गोधाम का दौरा किया और गोशाला को हर स्तर पर ष सहयोग देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि गोशालाएँ केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत की धुरी भी बन सकती हैं। मंत्री ने नवरात्रि के प्रथम दिवस पर गिरिराज परिक्रमा का अवसर प्राप्त किया और गोधाम के दर्शन किए। उन्होंने कहा कि इस पावन दिन पर गौमाता की सेवा करना सौभाग्य की
बात है। गोधाम में गायों के संरक्षण के साथ-साथ उनके उत्पादों से अनेक प्रकार की वस्तुएँ बनाई जा रही हैं जैसे दीवार के रंग, कागज, पूर्ति, अगरबत्ती, धूप, दीपक और यहाँ तक कि लकडी के विकल्प। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय का भी साधन बन रही है। मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि सरकार गोशालाओं को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने और उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने श्री जड़खोर गोशाला की सराहना करते हुए कहा कि यह पूरे प्रदेश में आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित होगी। गृह, गौपालन, पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य विभाग राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेदम ने श्री जड़खोर गोधाम में कहा कि सनातन धर्म केवल आस्था का विषय नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से करोड़ों वर्षों से प्रमाणित जीवनपद्धति है। उन्होंने कहा कि सनातन वैज्ञानिक पुष्ट धर्म को हर किसी को आत्मसात करना चाहिए, क्योंकि यही संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम् का सजीव संदेश देती है।
गृह राज्य मंत्री ने कहा कि वेद, पुराण और संत-महात्माओं की शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए हमें वासुदेव कुटुंबकम् के कार्यक्रम चलाने चाहिए। भारतीय संस्कृति की जड़ें संस्कारों से बनी हैं- भरत और राम की आदर्श गाथाएँ, पन्ना धाय का बलिदान और ऐसी अनगिनत कहानियाँ इस संस्कृति की अमर नींव हैं। उन्होंने गौमाता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गाय का दूध स्मृति को तीव्र करता है और शरीर को निरोगी बनाता है। गाँव में गोबर और गोमय के अनगिनत फायदे हैं, जो न केवल स्वास्थ्य बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अमूल्य हैं। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें जनता और गौसेवा दोनों का अवसर मिला है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गौमाता के प्रति प्रेम और समर्पण को भी रेखांकित किया। राज्य मंत्री ने अंत में “जय गोमाता, जय गोपाल के गगनभेदी नारों के साथ अपने उद्बोधन का समापन किया, जिससे सभा में उत्साह और भक्ति का भाव उमड़ पड़ा।