गंभीर आरोप: शाई गांव में बिना नोटिस किसान का आशियाना जमींदोज, दूध पीते बच्चे संग मां को घसीटा;. नीड २४ न्यूज महाराष्ट्र
विशेष वार्ता, मुरबाड (ठाणे)
दिनांक: २७/१०/२०२६.
जिल्हा रिपोर्टर काशिनाथ देसले ठाणे. तालुका रिपोर्टर किशोर पवार मुरबाड
मुरबाड: ठाणे जिले के मुरबाड तालुका अंतर्गत आने वाले शाई गांव में वन विभाग (फॉरेस्ट डिपार्टमेंट) की एक बेहद क्रूर और अमानवीय कार्रवाई का मामला सामने आया है।
वन विभाग के अधिकारियों ने भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच एक गरीब स्थानीय किसान, अनंत दळू भोईर के आशियाने पर सीधे बुलडोजर चला दिया। देखते ही देखते पीड़ित किसान का पूरा घर मलबे के ढेर में तब्दील हो गया।
इस अचानक और एकतरफा कार्रवाई के कारण जहां पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे आ गया है, वहीं पूरे मुरबाड तालुका के ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में प्रशासन के खिलाफ तीव्र आक्रोश व्याप्त है। दूध पीते नवजात को मां समेत जबरन बाहर फेंका
इस पूरी हिंसक कार्रवाई के दौरान वन विभाग का सबसे क्रूर और संवेदनहीन चेहरा तब उजागर हुआ, जब उन्होंने घर के भीतर मौजूद महिलाओं और बच्चों तक का लिहाज नहीं किया।
पीड़ित परिवार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, जिस वक्त बुलडोजर घर की दीवारों को ढहा रहा था, ठीक उसी समय घर के अंदर एक बेबस मां अपने महज दो महीने के नवजात शिशु को दूध पिला रही थी। वन विभाग के कर्मचारियों ने जरा भी मानवीय संवेदना नहीं दिखाई और उस दुधमुंहे बच्चे व उसकी मां को अत्यंत बदसलूकी करते हुए जबरन घसीटकर घर से बाहर निकाल दिया।
इस अमानवीय व्यवहार की चारों तरफ थू-थू हो रही है। लाखों का घरेलू सामान बर्बाद, दाने-दाने को मोहताज हुआ परिवार
बिना किसी पूर्व सूचना या मोहलत के की गई इस अचानक कार्रवाई के कारण पीड़ित परिवार को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
घर के भीतर रखा अनाज, कपड़े, बर्तन, बच्चों की किताबें और अन्य कीमती सामान मलबे में दबकर पूरी तरह नष्ट हो गए। ठंड के इस मौसम में दो महीने के मासूम बच्चे के साथ पूरा परिवार अब बेघर होकर सड़क पर आ गया है।
उनके पास न तो सिर छुपाने की जगह बची है और न ही खाने-पीने का कोई साधन। कोर्ट में चल रहा था मामला, अधिकारियों ने फोन किया बंद
सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस जमीन को लेकर वन विभाग की अदालत में पहले से ही सुनवाई चल रही थी।
मामला न्यायाधीन होने के बावजूद वन विभाग ने कानून को ताक पर रखकर यह तानाशाही कार्रवाई की, जो सीधे तौर पर मानवाधिकारों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। इस पूरे मामले पर जब 'नीड २४ न्यूज' की टीम ने प्रतिक्रिया लेने के लिए उप-वन संरक्षक (डीसीएफ) तुषार कालभोर से उनके मोबाइल पर संपर्क साधने की कोशिश की, तो उनका फोन लगातार बंद (स्विच ऑफ) आता रहा, जिससे वन विभाग की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
तहसीलदार कार्यालय पर फूटा गुस्सा, सौंपा ज्ञापन
इस बर्बरता की खबर फैलते ही शाई गांव सहित आसपास के सैकड़ों ग्रामीण एकजुट हो गए। संतप्त नागरिकों और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने मुरबाड तहसीलदार कार्यालय पर धावा बोला और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार को एक सख्त चेतावनी पत्र (ज्ञापन) सौंपकर तत्काल न्याय की मांग की है। ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगें:
• तत्काल आवास की व्यवस्था: बेघर हुए भोईर परिवार और उनके दो महीने के बच्चे को तुरंत रहने के लिए सरकारी स्तर पर वैकल्पिक पक्के मकान की व्यवस्था की जाए।
• पूर्ण आर्थिक मुआवजा: वन विभाग की तोड़फोड़ में नष्ट हुए अनाज और घरेलू सामान के नुकसान का पूरा पंचनामा कर परिवार को तुरंत उचित वित्तीय मुआवजा दिया जाए। • जमीन की संयुक्त पैमाइश: जिस जगह पर घर बना था, उसकी वन विभाग और भूमि अभिलेख (लैंड रिकॉर्ड्स) विभाग के माध्यम से संयुक्त रूप से निष्पक्ष नापजोख कराई जाए ताकि सच सामने आ सके।
• दोषियों पर एफआईआर: कानून का उल्लंघन कर महिलाओं और नवजात बच्चे के साथ अभद्रता करने वाले संबंधित वन अधिकारियों और कर्मचारियों को तुरंत निलंबित कर उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। नागरिकों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने २४ घंटे के भीतर पीड़ित परिवार को न्याय और सहायता नहीं दी, तो पूरे ठाणे जिले में वन विभाग के खिलाफ उग्र और तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह शासन की होगी।
