देदला की पहाड़ियों और जंगलों के बीच विराजित मां काली, लक्ष्मी और सरस्वती का प्राचीन धाम.. पक्की सड़क बनाकर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग..
रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597
मनावर। जिला धार।। मनावर से करीब 6 किलोमीटर दूर बड़वानी मार्ग पर ग्राम देदला से लगभग डेढ़ किलोमीटर अंदर पहाड़ियों के बीच मां काली, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां तीनों देवियां पिंडी स्वरूप में विराजित हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, माताजी बैकुल वृक्ष के नीचे स्वयं प्रकट हुई थीं। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस सिद्ध स्थल पर नवरात्रि के दोनों पर्वों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
*अष्टमी पर हवन, कन्याभोज और भंडारा*
शारदीय नवरात्रि की अष्टमी पर देदला माताजी मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन किया गया। ग्राम पंचायत सरपंच संतोषी इश्के पति संतोष इश्के ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन तथा हवन किया। इस अवसर पर कन्याभोज के साथ श्रद्धालुओं के लिए दिनभर भंडारे का आयोजन किया गया। भक्तों ने माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।
*गुफाएं, बावड़ी और प्राचीन इतिहास*
ग्रामीणों के अनुसार, करीब डेढ़ सौ वर्ष पहले इस स्थल की जानकारी सामने आई थी। यहां तीन प्राचीन गुफाएं, एक कुंड और कुछ दूरी पर पत्थरों से निर्मित पुरानी बावड़ी मौजूद है। आसपास खुदाई के दौरान पुराने अवशेष मिलने की बातें भी ग्रामीण बताते हैं। हालांकि, इनकी वास्तविक प्राचीनता की पुष्टि के लिए पुरातात्विक सर्वेक्षण आवश्यक है। वर्ष 1998 में यहां मंदिर का निर्माण कार्य किया गया था।
*पक्की सड़क बनने से बढ़ेगी सुविधा*
वर्तमान में मंदिर तक पहुंचने वाला मार्ग कच्चा और ऊबड़-खाबड़ होने से श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पक्की सड़क बनाने, मूलभूत सुविधाएं विकसित करने तथा प्राचीन गुफाओं और बावड़ी का सर्वेक्षण कराकर संरक्षण करने की मांग की है। उनका कहना है कि उचित विकास होने पर यह प्राचीन धाम धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में पहचान बना सकता है।
