मौदहा (हमीरपुर)। मौदहा कोतवाली क्षेत्र के कम्हरिया गांव में विख्यात सूफी संत हजरत रहमतुल्लाह निजामी बाबा का ऐतिहासिक उर्स धूमधाम और अकीदत के साथ मनाया जा रहा है।
18 अक्टूबर से शुरू हुआ उर्स 21 अक्टूबर को कुल की फातिहा के साथ संपन्न होगा। उर्स के दूसरे दिन सोमवार को बाबा की भव्य चादर निकाली गई, जिसमें हजारों की संख्या में अकीदतमंदों ने शामिल होकर अपनी श्रद्धा अर्पित की।
चादर जुलूस बाबा निजामी के पैदाइशी घर से शुरू होकर उनकी मजार तक पहुंचा। इस दौरान अकीदतमंदों में खासा उत्साह देखने को मिला।
बाबा के प्रति श्रद्धा और सम्मान के साथ निकाले गए चादर जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। पूरे क्षेत्र में उर्स को लेकर रौनक बनी हुई है और दूर-दराज से जायरीनों के पहुंचने का सिलसिला जारी है।
हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल है ऐतिहासिक मेला
कम्हरिया का यह ऐतिहासिक मेला हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। यहां देश-विदेश से हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग पहुंचकर बाबा की मजार पर चादर चढ़ाते हैं और दुआएं मांगते हैं।
मेले में दोनों समुदायों के लोगों की सहभागिता आपसी सद्भाव और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश देती है। जगह-जगह लंगर, 19 और 20 अक्टूबर को सजेगी कव्वाली की महफिल
उर्स में आने वाले अकीदतमंदों और जायरीनों की सुविधा के लिए मेला परिसर से लेकर बड़े चौराहे सहित विभिन्न स्थानों पर लंगर की व्यवस्था की गई है।
श्रद्धालुओं को पूड़ी-सब्जी सहित भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, 19 और 20 अक्टूबर को दूर-दराज के क्षेत्रों से आए कव्वालों द्वारा कव्वाली का कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात रहे 120 प्रशासनिक कर्मी
मेले में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के लिए दो पुलिस चौकियां बनाई गई हैं। साथ ही करीब 120 प्रशासनिक कर्मियों की तैनाती की गई है, ताकि मेले में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जा सके।
कम्हरिया का यह ऐतिहासिक उर्स धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत तस्वीर पेश कर रहा है।
