A2Z सभी खबर सभी जिले की

मध्यप्रदेश में फिर होंगे छात्रसंघ चुनाव

हाईकोर्ट के निर्देशों का छात्र नेताओं ने किया स्वागत, आठ साल बाद लोकतांत्रिक परिसर की उम्मीद जगी



दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597

(रिपोर्टर : अखंड भारत लाइव न्यूज/ पूर्व तहसील संयोजक, चुनाव संचालक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मनावर/ विश्लेषक : राजनीतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक/ एडवोकेट/ प्रेस रिपोर्टर)

मनावर। जिला धार। मध्यप्रदेश के महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराए जाने की लंबे समय से चली आ रही मांग के बीच उच्च न्यायालय द्वारा प्रदेश सरकार को छात्रसंघ चुनाव के संबंध में निर्देश दिए जाने का छात्र नेताओं ने स्वागत किया है। छात्र नेताओं का कहना है कि न्यायपालिका का यह कदम युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने और परिसर स्तर पर नेतृत्व क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

छात्रसंघ चुनावों को लोकतंत्र की प्रारंभिक पाठशाला बताते हुए छात्र नेताओं ने कहा कि इनके माध्यम से विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, उत्तरदायित्व, संवाद कौशल, संगठन क्षमता और जनसेवा की भावना विकसित होती है। ऐसे मंच से युवाओं को अपने विचार रखने, समस्याओं को लोकतांत्रिक तरीके से उठाने और प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलता है।

2017 के बाद से थमे हैं चुनाव : वर्ष 2017 के बाद से मध्यप्रदेश के महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं। लंबे अंतराल के बाद चुनाव प्रक्रिया दोबारा शुरू होने की संभावना से विद्यार्थियों में उत्साह है। छात्र नेताओं का मानना है कि छात्रसंघ चुनाव शुरू होने से युवाओं की सामाजिक भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें नेतृत्व की जिम्मेदारी निभाने का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।

लोकतंत्र की पहली पाठशाला हैं छात्रसंघ चुनाव : छात्र नेताओं ने कहा कि छात्रसंघ चुनावों को केवल राजनीतिक गतिविधि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह विद्यार्थियों की लोकतांत्रिक समझ, नेतृत्व क्षमता और भविष्य की जिम्मेदारियों से जुड़ा महत्वपूर्ण मंच है। लोकतंत्र की मजबूती केवल संसद और विधानसभा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी नींव उन संस्थानों में भी मजबूत होती है, जहां युवा पहली बार विचार व्यक्त करना, सहमति-असहमति दर्ज कराना और अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करना सीखते हैं।

लिंगदोह समिति की अनुशंसाओं के अनुरूप चुनाव की मांग : छात्र नेताओं ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि छात्रसंघ चुनाव लिंगदोह समिति की अनुशंसाओं के अनुरूप कराए जाएं। उनका कहना है कि पारदर्शी एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से योग्य, सक्षम और छात्र हितों के प्रति प्रतिबद्ध नेतृत्व सामने आ सकता है।

महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सुविधाओं, परीक्षा व्यवस्था, छात्रवृत्ति, पुस्तकालय, खेलकूद सहित विद्यार्थियों से जुड़े अनेक विषय हैं, जिन्हें प्रभावी ढंग से उठाने के लिए निर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों की आवश्यकता है। छात्रसंघ के माध्यम से विद्यार्थियों की समस्याओं को संस्थागत मंच मिल सकेगा।

छात्रसंघ चुनाव से होंगे ये प्रमुख लाभ
▪ विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता का विकास
▪ लोकतांत्रिक मूल्यों की समझ होगी मजबूत
▪ छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को मिलेगा प्रभावी मंच
▪ योग्य एवं जवाबदेह युवा नेतृत्व सामने आएगा
▪ महाविद्यालयों में लोकतांत्रिक वातावरण होगा मजबूत
▪ युवाओं की सामाजिक एवं राष्ट्र निर्माण में भागीदारी बढ़ेगी

छात्र नेताओं की प्रमुख मांग : “लिंगदोह समिति की अनुशंसाओं के अनुसार पारदर्शी एवं लोकतांत्रिक तरीके से छात्रसंघ चुनाव कराए जाएं, ताकि विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने और छात्र हितों की आवाज मजबूती से उठाने का अवसर मिल सके।”

Related Articles
Show More
Back to top button