
डिण्डौरी पूर्व विधायक धरम सिंह मसराम ने होटलों और गुमटियों में चाय काफी के लिए उपयोग किये जा रहे डिस्पोजल कप का उपयोग बंद कराने जिला कलेक्टर को लिखित आवेदन दिया है। जिसमें उन्होने डिस्पोजल से हो रहे नुकसान को स्पस्ट किया है।दिए गए आवेदन में उनके द्वारा बताया गया कि जिले में लंबे समय से होटलों गुमटियों के संचालकों द्वारा चाय काफी के लिए कागज प्लास्टिक के डिस्पोजलों का धडल्ले से उपयोग किया जा रहा है। यहाँ तक कि प्रायःसभी शासकीय कार्यालयों में भी चाय कॉफी के लिए कागज प्लास्टिक के डिस्पोजलों का उपयोग किया जाता है। जबकि वैज्ञानिक दृस्टिकोण से ये डिस्पोजल मानव स्वास्थ के लिए काफी खतरनाक हैं। सामान्य पेपर कप में पानी या कोई भी तरल पदार्थ लंबे समय तक नहीं टिक पाता इसी वजह से इनमें अंदर एक पतली प्लास्टिक की परत चढाई जाती है। जिन्हे माइकोप्लास्टिक कहा जाता है। जब इनमें चाय या काफी जैसे गरम तरल पदार्थ डाले जाते हैं तो ये प्लास्टिक के छोटे छोटे कण निकलकर ड्रिंक में घुल जाते हैं। यह कण इतने छोटे होते हैं कि इन्हे केवल माइकोस्कोप से ही देखा जा सकता है। आईआईटी खडगपुर की एक शोध में सामने आया है कि यदि इस पेपर कप में सिर्फ 15 मिनिट गरम तरल रख दिया जाए तो इसमे 20 हजार से 25 हजार तक माइकोप्लास्टिक कण निकलते हैं। यदि कोई व्यक्ति दिन में तीन कप भी चाय या काफी पी लेता है तो उसके शरीर में 75 हजार माइकोप्लास्टिक कण चले जाते हैं। लंबे समय तक शरीर में जमा होकर ये कण हार्मोनल असंतुलन थाइराइड और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का कारण भी बन सकते हैं। विगत दिनों मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ अधिकारी भोपाल द्वारा इस संबंध में एक प्रेस नोट जारी किया गया था। जिससे जनमानस के स्वास्थ से हो रहे खिलवाड को रोका जा सके।