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सातपुड़ा की तराई में दुर्गम क्षेत्र स्थित धुळेपाड़ा और डोंगरदे में आदिवासी भाइयों के साथ मनाई गई दिवाली

 

जलगाँव… (अनिलकुमार पालीवाल)… आज के तीव्र गति से बदलते विश्व में जहाँ सभी सुख-सुविधाएँ सहज उपलब्ध हैं, वहीं कुछ आदिवासी बस्तियाँ आज भी इन सुविधाओं से वंचित हैं। कठोर परिश्रम और मजदूरी के माध्यम से अपना जीवनयापन करना ही उनका भाग्य बन गया है। अतः दीपावली जैसे उत्सव पर भी उन्हें मिठाई अथवा विशेष खाद्य सामग्री मिलना दुरूह होता है। इसी परिस्थितियों को भावनात्मक रूप से समझते हुए भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी, जलगाँव शाखा ने यावल तहसील के सातपुड़ा पर्वत की तराई में स्थित धुळेपाड़ा के 35 परिवारों तथा डोंगरदे के 200 परिवारों के लिए रेडक्रॉस तथा दानदाताओं के सहयोग से जीवनावश्यक वस्तुओं (चावल, दाल, नमक, अचार, मिर्च, वस्त्र, प्रतिलिपियाँ, मिठाई, बाल्टी आदि) के किट तैयार कर मासूम बालकों, बहनों तथा वयोवृद्ध आदिवासी भाइयों में वितरित कर एक अनोखी दिवाली मनाई।

 

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दिनांक 20/10/2025 को रेडक्रॉस के सभी सहकर्मी व पदाधिकारी इस सेवा कार्य में संलग्न रहे। रेडक्रॉस के उपाध्यक्ष गनी मेमन तथा सचिव सुभाष सांखला के आह्वान पर दानवीर सज्जनों सहित पदाधिकारी पुष्पाताई भंडारी एवं उषा शर्मा ने सहयोग प्रदान किया। रेडक्रॉस के सहकर्मी समाधान, शीतल शिंपी, योगेश सपकाले, मनोज वाणी, उज्ज्वला वर्मा तथा अन्य सदस्यों-पदाधिकारियों ने किट तैयार कर दो वाहनों में सामग्री भरकर वितरण हेतु प्रस्थान किया।

 

भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी की अध्यक्षा डॉ. मंगला ठोंबरे, रक्त केंद्र के अध्यक्ष डॉ. प्रसन्नकुमार रेदासनी, राजकुमार वाणी, रेडक्रॉस सदस्य समीर शेफर्ड, प्रो. डॉ. राठौड़ तथा रेडक्रॉस के कर्मचारी मनोज वाणी, योगेश सुपकाले, समाधान, आमिर और अन्वर (वाहन चालक) दो वाहनों सहित इन आदिवासी बस्तियों में पहुँचे। इस क्षेत्र की भौगोलिक जानकारी रखने वाले मार्गदर्शक प्रो. डॉ. वडिंगर, यावल के रेडक्रॉस सदस्य गोपाल महाजन, मनीष चौधरी और श्रावगीजी ने भी महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया तथा सामग्री को सीधे बस्तियों तक पहुँचाने का कार्य उन्होंने निष्ठापूर्वक संपन्न किया।

 

बस्तियों का जीवन, सरलता और निष्कपटता प्रत्यक्ष रूप से अनुभव में आई। सभी परिवार छोटे-बड़े बच्चों सहित शांति और अनुशासन के साथ एकत्रित थे। सामग्री वितरण प्रारंभ होने तक किसी ने भी भीड़ या असावधानी नहीं दिखाई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि जिनके पास कुछ भी नहीं होता, उन्हें वस्तुओं के प्रति लोभ भी नहीं रहता।

 

इस प्रकार अपने पास उपलब्ध सामग्री दूसरों के साथ बाँटकर दीपावली मनाने का सच्चा आनंद रेडक्रॉस परिवार ने प्राप्त किया। इस पुनीत कार्य के लिए रेडक्रॉस के पदाधिकारियों, सदस्यों तथा सहकर्मियों ने अथक परिश्रम किया।

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