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बदलता राजस्थान : बाल विवाह में आई 66 प्रतिशत की गिरावट

आबूरोड एक रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में पिछले तीन वर्षों में लड़कियों के बाल विवाह की दर में 66% और लड़कों के बाल विवाह की दर में 67% की गिरावट आई है। ‘टिपिंग प्वॉइंट टू जीरो: एविडेंस टूवार्ड्स ए चाइल्ड मैरिज फ्री इंडिया’ नाम की ये रिपोर्ट जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) ने जारी की है। रिपोर्ट बताती है कि बाल विवाह के मुख्य कारणों में गरीबी (91%) और सांस्कृतिक व पारंपरिक मान्यताएं (45%) हैं। सिरोही जिले में बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए काम कर रहे जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन जन चेतना संस्थान ने पिछले तीन वर्षों में जिला प्रशासन, पंचायतों और सामुदायिक सदस्यों के साथ बेहद करीबी समन्वय से काम करते हुए जिले में 600 से अधिक बाल विवाह रुकवाए हैं। यह रिपोर्ट जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की पहल पर सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहैवियरल चेंज फॉर चिल्ड्रेन (सी-लैब) ने तैयार की है। बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राजस्थान में 17 सहयोगी संगठन राज्य के 38 जिलों में काम कर रहे हैं। इस सर्वे में राजस्थान के 150 गांवों के आंकड़े जुटाने के लिए सबसे पहले आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्कूल शिक्षकों, सहायक नर्सों, दाइयों और पंचायत सदस्यों जैसे अग्रिम पंक्ति के लोगों से संपर्क कर उन्हें इस शोध और सर्वे से जोड़ा गया। इस रिपोर्ट के नतीजों से उत्साहित जन चेतना संस्थान की निदेशक ऋचा औदीच्य यादव ने कहा, “राजस्थान के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। हमें बाल विवाह की रोकथाम के मोर्चे पर अभूतपूर्व और अप्रत्याशित नतीजे मिले हैं। अब हमें बदलाव की इस रफ्तार को कायम रखने के लिए जिला प्रशासन,कानून लागू करने वाली एजेंसियों और ग्रामीण समुदाय के साथ मिलकर और कड़ी मेहनत की जरूरत है।

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