हमीरपुर। दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने तथा किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के दलहन विकास निदेशालय के निदेशक डॉ. महेश कुमार ने जनपद हमीरपुर का तीन दिवसीय भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान उनके द्वारा जनपद के सुमेरपुर, मौदहा एवं कुरारा विकासखंडों में सामान्य बीज प्रदर्शन एवं नि:शुल्क दलहन बीज मिनीकिट का वितरण अपनी उपस्थिति में किसानों को कराया गया।
क्षेत्र भ्रमण के दौरान निदेशक ने तहसील मौदहा के ग्राम पड़ोहरी, तहसील सुमेरपुर के ग्राम नारायणपुर तथा विकासखंड कुरारा के ग्राम शंकरपुर पहुंचकर किसानों के साथ बैठक एवं संवाद किया। इस दौरान उन्होंने दलहन उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि करने तथा देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के संबंध में विस्तार से चर्चा की।
निदेशक डॉ. महेश कुमार ने बताया कि रबी सीजन में शत-प्रतिशत दलहन की बुवाई लाइन सोइंग विधि से की जाती है, जबकि खरीफ सीजन में अधिकांशतः छिटकवां विधि अपनाई जाती है। उन्होंने किसानों से अपील की कि खरीफ सीजन में भी दलहनी फसलों की बुवाई शत-प्रतिशत लाइन सोइंग विधि से करें। इस विधि से खेत में पौधों की संख्या उचित एवं संतुलित रहती है, पौधों का विकास बेहतर होता है तथा फसल की निराई-गुड़ाई एवं समुचित देखभाल में सुविधा मिलती है। परिणामस्वरूप प्रति इकाई क्षेत्रफल में उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि होती है।
उन्होंने बताया कि छिटकवां विधि से बुवाई करने पर खेत में पौधों की संख्या एवं उनका समुचित विकास प्रभावित होता है। इससे फसल की बढ़वार कमजोर रहती है तथा उत्पादन एवं उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए किसानों को वैज्ञानिक एवं उन्नत बुवाई पद्धति अपनानी चाहिए।
इस अवसर पर निदेशक ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि जिन किसानों को सामान्य अथवा नि:शुल्क दलहन बीज मिनीकिट वितरित किए जा रहे हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से लाइन सोइंग विधि से बुवाई के लिए प्रेरित किया जाए। साथ ही लाइन सोइंग विधि से कराई गई बुवाई का अभिलेख तैयार किया जाए तथा कृषि विभाग के पोर्टल पर शत-प्रतिशत बीज प्रदर्शन अनिवार्य रूप से अंकित कराया जाए।
उन्होंने निर्देश दिए कि आगामी खरीफ सीजन में जनपद के अधिकाधिक दलहन उत्पादक किसानों को लाइन सोइंग विधि अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए इसकी नियमित निगरानी एवं अभिलेखीकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि दलहन उत्पादन में वृद्धि के साथ देश को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
