तीन साल के अनुभव पर लाभ, 10 से 15 साल से सेवा दे रहे अतिथि शिक्षकों को भी मिले उचित सम्मान… विभागीय परीक्षा, भर्ती में उचित अवसर और सेवा सुरक्षा की उठी मांग; आजाद अतिथि शिक्षक संघ के जिला संरक्षक दीपक राव चव्हाण बोले—अनुभवी शिक्षकों के हितों की अनदेखी नहीं हो…
रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597
मनावर। जिला धार।। मध्यप्रदेश में अतिथि शिक्षकों की भर्ती नीति, सेवा सुरक्षा और भविष्य को लेकर एक बार फिर अनुभव आधारित व्यवस्था की मांग उठने लगी है। जुलाई 2007 से प्रदेश में लागू अतिथि शिक्षक योजना के तहत वर्षों से शासकीय विद्यालयों में अध्यापन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में लंबे समय तक योगदान देने के बावजूद उन्हें स्थायी भविष्य की चिंता सता रही है। ऐसे में सरकार को अतिथि शिक्षकों की सेवा अवधि, कार्य अनुभव और शैक्षणिक योगदान को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट एवं न्यायसंगत नीति बनानी चाहिए।
आजाद अतिथि शिक्षक संघ के जिला संरक्षक दीपक राव चव्हाण ने जानकारी देते हुए बताया कि अतिथि शिक्षकों को मिलने वाले लाभों की पात्रता अवधि पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि अतिथि शिक्षक आरक्षण अथवा अनुभव आधारित लाभ के लिए निर्धारित न्यूनतम सेवा अवधि को 3 वर्ष से बढ़ाकर कम से कम 6 वर्ष किया जाए। साथ ही, अतिथि शिक्षकों के लिए विभागीय परीक्षा आयोजित कर उनकी योग्यता और अनुभव के आधार पर विभागीय सुविधाओं का लाभ देने की व्यवस्था की जाए।
चव्हाण का कहना है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे अतिथि शिक्षक हैं, जो 10 से 15 वर्ष या उससे भी अधिक समय से कम मानदेय पर विद्यालयों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष शिक्षा व्यवस्था को दिए हैं। इसके बावजूद भर्ती प्रक्रिया में उनके अनुभव को पर्याप्त महत्व नहीं मिलने से उनमें असंतोष बढ़ रहा है। सरकार को ऐसे शिक्षकों के भविष्य की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
*विभागीय परीक्षा लेकर अनुभव के आधार पर मिले सुविधा का लाभ*
दीपक राव चव्हाण ने कहा कि अतिथि शिक्षकों की योग्यता और कार्य अनुभव का उचित आकलन करने के लिए विभागीय परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए। परीक्षा में निर्धारित मानकों के अनुसार पात्र पाए जाने वाले अतिथि शिक्षकों को विभागीय सुविधाओं का लाभ दिया जाए। वहीं, वर्तमान नियमों के अनुसार पात्रता पूरी नहीं करने वाले अतिथि शिक्षकों के मामले में भी उनकी वर्षों की सेवा और कार्य अनुभव को ध्यान में रखते हुए उचित सुविधा देने के लिए अलग प्रावधान बनाया जाना चाहिए।
उनका कहना है कि किसी शिक्षक ने लंबे समय तक विद्यालय में अध्यापन किया है तो उसके अनुभव को केवल पात्रता की तकनीकी शर्तों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। सरकार को ऐसी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए, जिसमें शैक्षणिक योग्यता, विभागीय परीक्षा, कार्य अनुभव और सेवा अवधि के आधार पर शिक्षकों को अवसर मिल सके।
उन्होंने कहा कि विभागीय परीक्षा के माध्यम से अतिथि शिक्षकों की योग्यता का आकलन किया जा सकता है। इससे वर्षों से कार्य कर रहे शिक्षकों को अपनी योग्यता साबित करने का अवसर मिलेगा और उनके अनुभव का भी उपयोग हो सकेगा। हालांकि, इसके लिए शासन को भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन कर स्पष्ट नीति निर्धारित करनी होगी।
*नए चयनित शिक्षकों और पुराने अतिथि शिक्षकों के बीच बढ़ रही प्रतिस्पर्धा*
चव्हाण ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में नए अभ्यर्थियों और वर्षों से सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों के बीच प्रतिस्पर्धा की स्थिति बन रही है। एक ओर नए अभ्यर्थी नियमित पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के आधार पर भर्ती प्रक्रिया में शामिल होकर चयनित हो जाते हैं, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से विद्यालयों में अध्यापन कर रहे अतिथि शिक्षकों को अपने भविष्य की चिंता बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन की नीतियों के कारण बेरोजगार नए अभ्यर्थियों और सेवारत अतिथि शिक्षकों के बीच प्रतिस्पर्धा की स्थिति बन जाती है। इससे दोनों वर्गों के बीच असंतोष पैदा होता है। नए अभ्यर्थियों को रोजगार के अवसर मिलना जरूरी है, लेकिन वर्षों से शिक्षा व्यवस्था में सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों के हितों की अनदेखी भी नहीं होनी चाहिए।
उनका कहना है कि सरकार जब नई शिक्षक भर्तियां करती है तो उसे यह भी देखना चाहिए कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों को किस प्रकार उचित अवसर दिया जा सकता है। केवल नई भर्तियों की संख्या बताने से उन पुराने शिक्षकों की समस्याओं का समाधान नहीं होता, जो वर्षों से कम मानदेय पर विद्यालयों में अध्यापन कर रहे हैं।
*आयु सीमा में छूट और भर्ती में अनुभव का मिले उचित महत्व*
अतिथि शिक्षकों से जुड़े प्रावधानों में निर्धारित शैक्षणिक सत्रों में कार्य करने वाले शिक्षकों को नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट तथा भर्ती प्रक्रिया में अनुभव आधारित अतिरिक्त अंकों या अन्य लाभ का प्रावधान रहा है। हालांकि, इन लाभों की वास्तविक पात्रता संबंधित भर्ती नियमों और विभागीय आदेशों पर निर्भर करती है।
ऐसे में लंबे समय से सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों की मांग है कि अनुभव आधारित लाभों की समीक्षा कर ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे वास्तविक रूप से लंबे समय तक अध्यापन करने वाले शिक्षकों को उचित अवसर मिल सके। उनका कहना है कि वर्षों का अनुभव रखने वाले शिक्षकों के लिए भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शी और न्यायसंगत व्यवस्था होनी चाहिए।
अतिथि शिक्षक चाहते हैं कि सरकार सेवा अवधि के आधार पर प्राथमिकता, नियमित भर्ती में उचित अवसर, सम्मानजनक मानदेय, सेवा में निरंतरता और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर ठोस निर्णय ले। इससे लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को भविष्य की योजना बनाने में मदद मिलेगी।
*मुख्यमंत्री से नीति में बदलाव की मांग*
आजाद अतिथि शिक्षक संघ के जिला संरक्षक दीपक राव चव्हाण ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से अतिथि शिक्षकों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने का अनुरोध किया है। उन्होंने मांग की कि जुलाई 2007 से संचालित अतिथि शिक्षक योजना के तहत सेवाएं दे रहे शिक्षकों की स्थिति का व्यापक आकलन किया जाए और उनके अनुभव को ध्यान में रखते हुए नई नीति बनाई जाए।
उन्होंने कहा कि अतिथि शिक्षकों के लिए विभागीय परीक्षा, सेवा अवधि के आधार पर उचित सुविधा, आरक्षण की पात्रता अवधि में संशोधन तथा लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के भविष्य की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर निर्णय लेने की जरूरत है। पात्रता की निर्धारित शर्तें पूरी नहीं करने वाले शिक्षकों के मामलों में भी उनके कार्य अनुभव और सेवा अवधि के आधार पर राहत देने के लिए उचित प्रावधान तैयार किए जाने चाहिए।
चव्हाण के अनुसार, अतिथि शिक्षकों ने वर्षों तक प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में योगदान दिया है। ऐसे में उनके अनुभव और समर्पण को नीति निर्धारण में उचित स्थान मिलना चाहिए। सरकार यदि अनुभव आधारित व्यवस्था तैयार करती है, तो इससे सेवारत अतिथि शिक्षकों की चिंताओं को दूर करने के साथ नए अभ्यर्थियों और पुराने शिक्षकों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में भी प्रयास किया जा सकेगा।
अब अतिथि शिक्षकों की निगाहें सरकार के निर्णय पर टिकी हैं। उनकी अपेक्षा है कि सरकार केवल नई भर्तियों तक सीमित न रहकर वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों के भविष्य, सम्मान और आर्थिक सुरक्षा को लेकर भी ठोस कदम उठाए।।
