आलीराजपुर जिला ब्यूरोचिफ दीपक शर्मा
निजी कंपनियों पर भारत का क़ानून लागू नहीं होता है ? चंद्रशेखर आजाद नगर :- चंद्रशेखर आजाद नगर में 800 केवी के विद्युत टावर के निर्माण बिना अनुमति किसानों के खेत में निर्माण कार्य चालू कर देने के विरोध में सर्व आदिवासी समाज द्वारा बीते तीन दिनों से जारी धरना और आमरण अनशन चल रहा था उसका आज एक सप्ताह के लिए समाप्त हुआ।
आजाद नगर SDM के आश्वासन पर दिनेश निनामा और महेश मावी ने नारियल पानी पीकर अपना अनशन समाप्त किया । SDM दीपिका पाटीदार द्वारा विद्युत टावर निर्माण करने वाली कंपनी के अधिकारी एवं कर्मचारियों के खिलाफ जांच कर वैधानिक करने का आश्वास दिया है।
दोनों आदिवासी समाज के युवकों को स्थानीय शासकीय अस्पताल में मेडिकल जांच के लिए भेजा है जहां उसकी जांच कर उनका घर भेज दिया गया। अब सवाल ये उठता हैं कि शासन कोसारे विकास कार्य केवल आमजनता की जमीन से ही क्यों किये जा रहे हैं चाहे वो बायपास रोड निर्माण हो या विद्युत वितरण टावर हो या नलजल योजना की पाइपलाइन हो।
कभी किसी नेता की जमीन पर ये विकास कार्य शुरू क्यों नहीं होते हैं? शासन प्रशासन जनता की शिकायत बिना किसी आंदोलन के क्यों नहीं सुनता है?
अनशन करने वाले युवाओं से कोई नेता क्यों नहीं गया मिलने ताकि विकास की योजना को समझा सके जबकि जब कोई बड़ा नेता आता है तो गांव गांव से जनता को बुला लिया जाता है या वोट लेना हो तो घर घर चले जाते हैं परंतु वहीं जनता अपनी समस्याओं को लेकर जाता है तो उसकी सुनवाई नहीं होती है उसे केवल कानून बताया जाता है। शासन जन विश्वास,सेवा संकल्प जैसे कार्यक्रमों में लाखों खर्च कर रहा है कही नशा मुक्ति का दिखावा कर रहा है।
सरकार चाहे तो पूरे देश में शराब दुकानें बंद कर सकती हैं फिर नशा मुक्ति अभियान का दिखावा क्यों ? जनता को भ्रमित करने के लिए।
नशा मुक्ति की बाते करने वाला प्रशासन सरकारी दुकानों से होलसेल में बिकने वाली शराब पर कार्यवाही क्यों नहीं करता है? जबकि शराब पेटी बेचने का सरकारी दुकानों को अनुमति नहीं है।
कार्यवाही के नाम पर केवल आश्वासन दिया जाता है फिर उस आश्वासन का क्या होता है? कोई नहीं जानता हैं कही इस बार भी सात दिनों के बाद कुछ भी न हो ।
