अपने को आप को समझते हैं DPRO और कहते कि जिले से लेकर लखनऊ तक हमारा कोई कुछ नहीं कर सकता है
मीरजापुर के नारायनपुर ब्लॉक में सफाईकर्मी कंप्यूटर पर काम कर रहे हैं, जबकि गांवों में गंदगी फैली हुई है। स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य कागजों तक सीमित दिख रहा है, क्योंकि सफाईकर्मी अपने मूल कार्यस्थलों से गायब हैं।
पंचायती राज विभाग की व्यवस्था के तहत, सफाईकर्मी अब गांवों की गलियों की सफाई करने के बजाय ब्लॉक दफ्तर में फाइलों का काम कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, बल्लीपुर गांव में स्वच्छता की जिम्मेदारी संभालने वाले सफाईकर्मी रवि कुमार प्रजापति ब्लॉक मुख्यालय पर कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका निभा रहे हैं।
यह स्थिति अकेले रवि कुमार प्रजापति की नहीं है। राकेश धुरिया, प्रदीप पांडे और जोखन कुमार सहित कई अन्य सफाईकर्मी भी ब्लॉक और तहसील कार्यालयों में तैनात हैं। इस वजह से गांवों में गंदगी का ढेर लगा हुआ है।
सरकारी नियमों के अनुसार, सफाईकर्मियों को गांवों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए नियुक्त किया जाता है। लेकिन, जब वे कार्यालयों में काम कर रहे हैं, तो सवाल उठता है कि अगर कोई गोपनीय दस्तावेज लीक होता है या सरकारी काम में कोई चूक होती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।
सफाईकर्मियों के नदारद रहने से बल्लीपुर सहित आसपास के गांवों में नालियां जाम हैं और गंदगी फैली हुई है, जिससे बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। दिलचस्प बात यह है कि इन कार्यालयों में काम कर रहे सफाईकर्मियों को पूरा वेतन मिल रहा है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जब ये कर्मचारी ब्लॉक में तैनात हैं, तो प्रधान और पंचायत सचिव किस आधार पर इनका वेतन जारी कर रहे हैं।
